बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू नदी का जलस्तर भले ही खतरे के निशान से नीचे आ गया है, लेकिन रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर में कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को नदी की तेज धारा में दो मकान नदी में समा गए। वहीं कटान की जद में आए तेज नारायण, महेंद्र, लव कुमार, ब्रजेश, विमला, शायरा बानो, कासिम और कय्यूम के मकानों को पोकलैंड से गिराया गया।
मकान गिराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वहीं बुलडोजर और पोकलैंड मशीन से गिराए गए आठ मकानों के मुआवजे को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
दो मकान नदी में समाए
रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से घटकर 10 सेंटीमीटर नीचे हो गया है। इसके बावजूद नदी में लगातार कटान जारी है। गुरुवार को गांव के शोभाराम और मंशाराम के मकान कटान की चपेट में आकर नदी में समा गए।
इसके साथ ही बाबा नारायण दास जी के मंदिर को बचाने के लिए कटान की जद में आने वाले आठ मकान पोकलैंड से तोड़े गए।
मकानों के मलबे से कटान रोकने का प्रयास
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ खंड और क्षेत्रीय लेखपाल सौरभ ने उनसे कहा कि यदि वे अपने मकान खुद नहीं गिराएंगे तो ऐसी स्थिति में उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाएगा।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गिराए गए मकानों से निकले मलबे को बोरियों में भरकर कटान रोकने के लिए नदी में डाला जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि नंद किशोर सिंह वर्मा का मकान भी कटान की कगार पर नदी में लटका हुआ है, लेकिन उसे अभी तक नहीं गिराया गया है।

