अयोध्या. सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है. पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है. इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है. सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की शांति और उनकी प्रसन्नता के लिए तर्पण, पिंडदान, दान और पूजा-पाठ किया जाता है. अयोध्या के पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि पितृ पक्ष के 15 दिनों में पितरों के अपने परिजनों के बीच आने की धार्मिक मान्यता है. इस दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों को जल अर्पित करते हैं, तर्पण करते हैं और उनकी स्मृति में दान-पुण्य करते हैं. मान्यता है कि तर्पण, दान, यज्ञ, हवन और जप जैसे धार्मिक कार्य पितरों को संतुष्टि प्रदान करते हैं. सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के वापस पितृलोक जाने की मान्यता है. इस दिन किए गए धार्मिक कर्म को पितरों की शांति, सद्गति और प्रसन्नता से जोड़कर देखा जाता है.
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह उठने के बाद बिस्तर पर ही पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए कम से कम 12 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. भगवान विष्णु से पितरों की प्रसन्नता और परिवार पर उनका आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करें. मंत्र जाप के बाद स्नान करें. स्नान करने के पश्चात तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लें. इसमें अक्षत और काले तिल डालें. इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें. यह तर्पण नदी, सरोवर या किसी पवित्र जल स्थान के किनारे किया जा सकता है. अगर वहां जाना संभव न हो तो घर के खुले और स्वच्छ स्थान पर भी पितरों को जल अर्पित किया जा सकता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या पर काले तिल का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है.
पितरों की पसंद का होना जरूरी
पंडित कल्कि राम के मुताबिक, तर्पण के बाद घर में सात्विक भोजन तैयार करें. भोजन में पूड़ी को जरूर शामिल करें. इसके बाद किसी ब्राह्मण, जरूरतमंद या पात्र व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं. अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसे दान भी दें. पंडित कल्कि राम के अनुसार, पितरों को जो वस्तुएं पसंद थीं, उनकी स्मृति में जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या उसकी आवश्यकता की उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है. सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किए गए तर्पण, दान और सेवा से पितरों की शांति की कामना की जाती है. इस दिन पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी जरूरी माना जाता है.

