नई दिल्ली: छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया। इस संबंध में पुलिस ने शनिवार को तीन प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो प्राथमिकी संसद मार्ग थाने और एक प्राथमिकी कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत लोक सेवक की ओर से विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा का आरोप लगाया गया है।
FIR में कोई नामजद आरोपी नहीं
अधिकारी ने बताया कि FIR में किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है। हालांकि, प्राथमिकी में उन आयोजकों और संगठनों की डिटेल्स दी गई है, जिन्होंने प्रदर्शन का आह्वान किया था या उसमें हिस्सा लिया था। शुक्रवार को छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों के नेताओं और नागरिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर लगाए गए आरोपों के बीच कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पहुंचने का प्रयास किया था।
इसलिए पुलिस का एक्शन
प्राथमिकी में इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग का पक्ष और उसकी ओर से दिए गए जवाबों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत नयी दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात का सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रदर्शन से पहले ये आदेश जारी किए गए थे।
2 अक्टूबर को जंतर मंतर हुआ था प्रोटेस्ट
धारा 163 के तहत पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने आदि पर रोक थी। शुक्रवार को पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोक दिया और जंतर-मंतर तथा आसपास के इलाकों से करीब एक हजार लोगों को हिरासत में लिया। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया।

