जबलपुर। बागेश्वर धाम में मार्च में सामने आए नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की अदालत ने आरोपित राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।
दो महीने के भीतर असली दोषी का पता लगाएं: कोर्ट
हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भले ही आरोपी का DNA भ्रूण से मैच नहीं हुआ है, लेकिन यह सच है कि 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे और वह गर्भवती हुई थी. अदालत ने छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत एक विशेष टीम बनाने का निर्देश दिया है. इस टीम को अगले दो महीनों के भीतर यह पता लगाना होगा कि नाबालिग के साथ यौन शोषण करने वाला असली गुनहगार कौन है और उस भ्रूण का असली जैविक पिता कौन है?
15 मार्च को अकेली आई थी नाबालिग
अभियोजन के मुताबिक, नाबालिग 15 मार्च को अकेले बागेश्वर धाम पहुंची थी। 17 मार्च को उसकी मुलाकात राजू जाटव से हुई। आरोप है कि राजू उसे घर छोड़ने की बात कहकर अपने साथ ले गया और करीब 15 दिनों तक अपने पास रखा। इसके बाद वह नाबालिग को ट्रेन से पचोर ले गया।
पुलिस ने राजू की पत्नी की निशानदेही पर नाबालिग को बरामद किया था। जांच के दौरान नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। गर्भपात के बाद अदालत ने भ्रूण की डीएनए जांच कराने के निर्देश दिए थे।
डीएनए रिपोर्ट में राजू को जैविक पिता नहीं माना गया
29 अगस्त को सामने आई डीएनए रिपोर्ट में राजू जाटव को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया। मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब नाबालिग ने अदालत के समक्ष राजू द्वारा दुष्कर्म किए जाने से इन्कार किया।
हालांकि, पुलिस के समक्ष दर्ज उसके पूर्व बयानों में उसने राजू पर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। बयानों में अंतर और डीएनए रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत महसूस की।
अब विशेष जांच टीम पूरे मामले की नए सिरे से पड़ताल करेगी और यह पता लगाएगी कि नाबालिग के साथ वास्तव में किसने यौन अपराध किया तथा गर्भ में पल रहे भ्रूण का जैविक पिता कौन था।

