नई दिल्ली। बांड यील्ड में लगातार वृद्धि के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में दबाव में नजर आ रहा। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 मिले-जुले रुख के साथ सपाट खुले। हालांकि कुछ ही समय बाद बाजार पर और दबाव नजर आया और ये नीचे फिसल गए।
निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा मौद्रिक नीति के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं, जबकि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।
कितनी है सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट?
दोपहर 2.30 बजे सेंसेक्स में 1147.58 अंकों यानी 1.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और ये 71,491.12 पर है। निफ्टी 50 ने 22,254.30 तक की डुबकी लगाई है। इस समय ये 1.74 फीसदी या 393.80 अंक गिरकर 22,209.25
पर है।
किन सेक्टर्स में आई तबाही?
सेक्टोरल प्रदर्शन में देखें तो निफ्टी ऑटो में 1.78 फीसदी, एफएमसीजी में 1.81 फीसदी, मीडिया में 1.71 फीसदी, मेटल में 3.23 फीसदी, फार्मा में 2.13 फीसदी, रियल्टी में 2.39 फीसदी, हेल्थकेयर में 2.21 फीसदी, तेल-गैस में 2.60 फीसदी और निफ्टी 500 हेल्थकेयर में 2.29 फीसदी की गिरावट है।
सुबह मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टरों में भी हल्की मजबूती देखने को मिली थी।
क्यों गिर रहा मार्केट?
विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई द्वारा अपनाए गए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ गया है। ऊंची ब्याज दरों के कारण फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों का झुकाव फार्मास्यूटिकल्स जैसे उन क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है, जिन पर ब्याज दरों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।
FII की तरफ से बिकवाली जारी
बाजार जानकारों के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अभी अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है।

