मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने अहिल्यानगर के हरेगांव गांव में 1,200 एकड़ उपजाऊ जमीन मुंबई की कंपनी ‘विश्वराज रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड’ को लीज़ पर दी है। इस कंपनी के मालिक सारंग लखानी हैं। सारंग लखानी, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले के दामाद और BJP MLC अरुण लखानी के बेटे हैं। अरुण लखानी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है। 5 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, महाराष्ट्र स्टेट फार्मिंग कॉर्पोरेशन के पास मौजूद यह जमीन कंपनी को 49 साल के लिए लीज़ पर दी गई है।
यह आवंटन सरकार के एक और प्राइवेट कंपनी, ‘निबे ग्रुप’ को 1,500 एकड़ जमीन लीज पर देने का आदेश जारी करने के दो हफ्ते के भीतर ही किया गया है। सरकार ने रक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) को भी 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की है।
अंजलि दमानिया ने उठाए सवाल
सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने बिना टेंडर प्रक्रिया के किसी प्राइवेट कंपनी को सरकारी जमीन आवंटित करने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी जमीन के सौदे के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाला गया और क्या कॉम्पिटिटिव बिडिंग (प्रतिस्पर्धी बोली) से सरकार को लीज से ज्यादा रकम मिल सकती थी। उन्होंने आवंटन प्रक्रिया और लीज की शर्तों पर चिंता जताई।
सिर्फ तीन महीने बाद जमीन आवंटन पर सवाल
अंजलि दमानिया ने बताया कि जून में सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत ‘महाऊर्जा’ के जरिए इस जमीन पर ग्रीन एनर्जी पार्क विकसित करने का फैसला किया था। हालांकि, सिर्फ तीन महीने बाद, सितंबर में, वही 1,200 एकड़ जमीन सीधे एक प्राइवेट कंपनी को आवंटित कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि पॉलिसी में इस बदलाव का निर्देश किसने दिया और कहा कि सरकारी आदेश में इसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया है।
‘पहले ट्रायल के लिए 5 साल के लिए क्यों नहीं दी गई जमीन?’
अंजलि दमानिया ने 48 साल की लीज (जिसे आगे और 48 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है) के प्रावधान पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जमीन को शुरू में ट्रायल के तौर पर पांच साल के लिए लीज पर क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि सिक्योरिटी डिपॉज़िट क्यों माफ कर दिया गया। अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया कि कुछ कारोबारी राजनीति में आते हैं और पैसा कमाने के लिए राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हैं।
अंजलि दमानिया ने उठाए ये सवाल भी
इस आदेश के तहत विश्वराज रिन्यूएबल्स को सरकारी मंजूरी मिलने पर अपनी सब्सिडियरी या ग्रुप की किसी दूसरी कंपनी को जमीन लीज पर देने की इजाजत दी गई है। कंपनी को इस काम के लिए महाराष्ट्र स्टेट फार्मिंग कॉर्पोरेशन से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेने से भी छूट दी गई है। यह आदेश 23 जून को हुई एक बैठक का जिक्र करता है जिसमें रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले, इंडस्ट्रीज मिनिस्टर उदय सामंत और एनवायरनमेंट मिनिस्टर पंकजा मुंडे शामिल थे।
मूल किसानों के जमीन के अधिकार
इस आवंटन ने हरेगांव में लंबे समय से चल रहे जमीन के विवाद की ओर फिर से ध्यान खींचा है। अंग्रेजों के शासनकाल में, स्थानीय किसानों से लगभग 7,376 एकड़ जमीन ली गई थी। जमीन के असली मालिक और उनके परिवार अपनी जमीन वापस पाने की मांग करते रहे हैं। राज्य सरकार ने 15 सितंबर को असली किसानों को जमीन वापस करने का फैसला किया था। हालांकि, अब कॉर्पोरेशन के नियंत्रण वाली जमीन का कुछ हिस्सा रक्षा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लीज पर दिया जा रहा है।
सुप्रिया सुले ने दिया जवाब
सरकार ने 23 अगस्त को निबे ग्रुप को 1,500 एकड़ और DRDO को 1,500 एकड़ जमीन लीज पर देने का आदेश जारी किया था। 5 अक्टूबर के आदेश में विश्वराज रिन्यूएबल्स को अतिरिक्त 1,200 एकड़ जमीन लीज़ पर देने की बात कही गई है। इन आवंटनों ने अपनाई गई प्रक्रिया, लीज की शर्तों और जमीन पर खेती करने वाले मूल परिवारों के दावों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रिया सुले ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके दामाद का कारोबार और पेशेवर गतिविधियां पूरी तरह से उनका निजी मामला है। उन्होंने पूछा, ‘मेरे दामाद क्या कारोबार या काम करते हैं, यह पूरी तरह से उनका निजी मामला है। मैं इस पर कैसे टिप्पणी कर सकती हूं?’

