अंबाला. हरियाणा के अंबाला शहर का मां दुख भंजनी मंदिर नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना जाता है. यहां मां काली के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं. मंदिर की सबसे खास परंपरा नवरात्रि में मां काली को दूध से स्नान कराने की है. इसी क्रम में, नवरात्रि के तीसरे दिन मां का दूध से अभिषेक किया गया. मंदिर के पंडित पंकज वशिष्ठ लोकल 18 से बताते हैं कि नवरात्रि में मां काली को दूध से स्नान कराने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. श्रद्धालु सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक मां का दूध से अभिषेक करते हैं. इसके बाद दूध को प्रसाद के रूप में प्राप्त किया जाता है. मंदिर में मां का दूध से स्नान कराने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है. मान्यता के अनुसार, जो महिलाएं मां को दूध से स्नान कराती हैं, उन्हें ‘दूधों नहाओ, पूतों फलो’ का आशीर्वाद मिलता है.
पंडित पंकज वशिष्ठ के अनुसार दूध से स्नान की परंपरा पूरी होने के बाद मां की पालकी पूरे शहर में निकाली जाएगी. इसके अगले दिन मां का ताजपोशी कार्यक्रम होगा, जिसे मंदिर की विशेष धार्मिक परंपराओं में शामिल माना जाता है. इस बार मां की ज्योत गुजरात स्थित अंबाजी शक्तिपीठ से लाई गई है. इसे 82 श्रद्धालु लेकर आए हैं. नवरात्रि के सातवें दिन मंदिर में भक्तों की ओर से मां की अखंड ज्योति जलाई जाएगी. आठवें दिन बच्चों की प्रतियोगिता होगी. इसमें हिस्सा लेने वाले बच्चों को नौवें दिन पुरस्कार दिया जाएगा
पंडित पंकज वशिष्ठ बताते हैं कि मां दुख भंजनी मंदिर की एक खास पहचान इसकी अनूठी बनावट भी है. यह मंदिर एक तालाब के बीच में है और पानी से घिरा हुआ. नवरात्रि के अलावा भी यहां रोजाना भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, शनिवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है. श्रद्धालु अक्षत शर्मा कहते हैं कि वे लंबे समय से यहां माथा टेकने आ रहे हैं. नवरात्रि के दौरान मंदिर की रौनक देखते ही बनती है. पूरे दिन मां के भजन-कीर्तन होते रहते हैं. श्रद्धालु मां से अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. उन्हें भी मां पर अटूट विश्वास है.

