गुवाहाटी: वोट चोरी, एसआईआर के साथ सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर मोर्चा खोले लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने चैलेंज किया है। हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा है कि केरल, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारें इस्तीफा दें तो बैलेट पेपर से चुनावल लड़ूंगा। सोमवार को दिल्ली में राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस केरल, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारों से इस्तीफा दिलाने को तैयार है, तो वह बैलेट पेपर के जरिए चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
बैलेट पेपर पर लड़ें चुनाव
सरमा का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्षी INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के बीच आया है। गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरमा ने कहा कि अगर राहुल गांधी और कांग्रेस अपनी सरकारों के इस्तीफे के लिए तैयार हैं, तो वह बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारें भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कथित ‘वोट चोरी’ के जरिए सत्ता में आई हैं।
प्रोटेस्ट के लिए नहीं थे पर्याप्त लोग
सरमा ने कांग्रेस के दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त लोग नहीं थे और पार्टी को दूसरे राज्यों से लोगों को लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर एक नई परंपरा स्थापित करना चाहते हैं और सांसद पद से इस्तीफा देकर आंदोलन शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकते हैं। असम के मुख्यमंत्री ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में हर पांच साल में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण होना चाहिए। उनके अनुसार, असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड की जनसांख्यिकी में अवैध प्रवासन के कारण बदलाव आया है।
सरमा बोले-SIR बहुत जरूरी है
सरमा ने दावा किया कि यदि मतदाता सूची से अवैध प्रवासियों के नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं हुई, तो देश की जनसांख्यिकी में और बदलाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नियमित रूप से मतदाता सूचियों की समीक्षा आवश्यक है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने और SIR प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं को मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग और तीनों चुनाव आयुक्तों के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए अदालत परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।

