
रायपुर। चारों नवरात्र हर साल तीन-तीन महीने की दूरी पर प्रत्यक्ष तौर पर चैत्र, गुप्त आषाढ़, प्रत्यक्ष आश्विन और पौष माघ में मां दुर्गा की उपासना करके इच्छित फल प्राप्त की जाती है। प्रत्यक्ष नवरात्र में मां के नव स्वरूपों की पूजा की जाती है और गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रों का महत्व प्रभाव और पूजा बताने वाले ऋषियों में श्रंृगी ऋषि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार एक महिला श्रृंगी ऋषि के पास आई और अपने कष्टों के बारे में महिला ने हाथ जोड़कर ऋषि से कहा मेरे पति संकट से घिरे हुए है। इस कारण कोई धार्मिक कार्य, व्रत नहीं कर पा रही हूं, ऐसे में मैं क्या करुं कि मां की शक्ति प्राप्त हो, मुझे मेरे कष्टों से मुक्ति मिले, तब ऋषि ने महिला को कष्टों से मुक्ति पाने के लिए गुप्त नवरात्र साधना के लिए कहा था। ऋषिवर ने गुप्त नवरात्र में साधना के बारे में बताते हुए कहा कि इससे तुम्हारा सन्मार्ग की तरफ तुम्हारा पारिवारिक जीवन खुशियों से भर जाएगा। वैदिक आध्यात्म परंपरा प्राणधार श्रध्ये मां भगवती के उपासक एवं भगवताचार्य और त्रिकालदर्शी (चाउर वाले बाबा) की उपाधि से नवाजे गये गुरुजी श्रीश्री पंडित नरेन्द्र नयन शास्त्री जी ने अपने सभी शिष्यों को गुप्त नवरात्रि के पर्व पर मंगलमय कामना के साथ आशीर्वाद दिया है।