नई दिल्ली। केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नई गाइडलाइन जारी करेगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म के जरिए बीते एक साल में कई विवाद पैदा हुए। चाहे वो किसी टीवी सीरीज के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करना हो या झूठे वीडियो, फोटो, संदेश, फैलाकर दंगे करवाना या फिर किसी भी भ्रामक तथ्य के जरिए किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाना हो। ओटीटी प्लेटफॉर्म बाद में माफी मांगकर सामग्री हटाकर या नीतियां बदलकर बचते रहे हैं, लेकिन अब इन्हें सरकारी गाइडलाइन मानने पड़ेगी। इसके अलावा ट्विटर विवाद से नाराज सरकार अब सोशल मीडिया कंपनियों को नियंत्रण में रखने के लिए भी नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। अब ऐसा मुमकिन है कि सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर कोई फर्जी संदेश किसने और कब चलाया, सरकार ये जान सकेगी। सोशल मीडिया, ओटीटी और न्यूज वेबसाइट के लिए नए नियमों के बारे में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावडेकर घोषणा करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के नोटिस के 72 घंटे के अंदर उसपर कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही टेक कंपनियों को शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और चीफ कंपलायंस ऑफिसर की तैनाती करनी होगी।
जारी होंगी ये गाइडलाइंस
कानूनी एजेंसियों से तालमेल के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी करनी होगी। हर छह महीने में शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म को तीन स्तरीय व्यवस्था करनी होगी। एक कंपनी के स्तर पर, दूसरा सैल्फ रेग्यूलेशन के लिए और तीसरा ओवरसाइट मैकेनिज्म। दर्शकों की उम्र के हिसाब से ओटीटी के कंटेट का वर्गीकरण होगा- यू, यूए 7, यूए 13 आदि वर्गीकरण हिंसा, सैक्स, नग्नता, भाषा, ड्रग्स आदि के आधार पर भी होगा।
सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर कोई फर्जी संदेश किसने और कब चलाया, सरकार ये जान सकेगी…
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