रायपुर। स्वास्थ्य चेतना विकास समिति छत्तीसगढ़ एवं पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कोरोना वायरस के रोकथाम में आयुर्वेद, होम्योपैथी, तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति को भी अवसर देने की मांग छत्तीसगढ़ शासन से की है और सूरजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 5 मई 21 को जिले के सभी बी एम ओ के नाम जारी पत्र में कोरोना संक्रमित लोगो को आयुर्वेद चिकित्सा नही देने के आदेश पर घोर आपत्ति जताया है और आयुर्वेद चिकित्सा पर आम जन को हतोत्साहित करने वाले इस आदेश पर स्वास्थ्य अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है।
उन्होंने आगे कहा है कि करोना वायरस के संक्रमण काल में छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा आयुर्वेद, होम्योपैथी, तथा यूनानी के पुराने चिकित्सा पद्धति को अनदेखा किया जा रहा है और कोरोना वायरस के रोकथाम में लगभग पूर्णत: एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति पर आश्रित होकर रह गई है। जबकि अन्य अनेक प्रदेश जिसमे मध्यप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु आदि के अलावा और भी प्रमुख राज्य है जो पुरानी चिकित्सा पद्धतियों को भी अवसर देकर कोविड 19 के विश्वब्यापी महामारी को कंट्रोल करने में समर्थ हुये है। जारी विज्ञप्ति में उन्होनें आगे बताया है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने वाली अनेक औषधियां और काढ़ा आदि उपलब्ध है, यह भी उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में अधिकतर आयुर्वेद औषधालय गाँवों में संचालित है, जिसका उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के फैलाव से बचाव किया जा सकता है परन्तु ये सभी औषधालय इन दिनों बन्द जैसे स्थिति में है क्योंकि आयुर्वेद चिकित्सकों की ड्यूटी कोविड सेन्टरों में लगा दी गई हैं। जारी विज्ञप्ति में उन्होनें मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इसे संज्ञान में लेकर राज्य सरकार को कार्य योजना बनाकर आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सकों को फ्री हैंड देकर आयुर्वेद चिकित्सा विभाग को कार्य करने का अवसर देने की मांग की है।
