जीवन में सफलता पाने के लिए गुरु शिक्षा का होना आवश्यक है, बिना गुरु शिक्षा के सफलता पाना मुश्किल है। गुरु के द्वारा अर्जित शिक्षा को ग्रहण करने के बाद ही व्यक्ति को अपना लक्ष्य निर्धारण कर उस लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास करना चाहिये। कुछ ऐसा ही ज्ञान आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अरुण चौबे जी महाराज अपने शिष्यों को देते है। वे अपने सभी शिष्यों को समय-समय पर पथ प्रदर्शन करते है। जब भी कोई शिष्य किसी परेशानी में होते है तो वे अपने ज्ञान के माध्यम से उस परेशानी से बाहर निकाल लेते हैं। गुरु जीवन का सही रास्ता बताता है और भक्तों को सही रास्ते पर लाता है। गुरु के बिना कोई भी महान होने की कल्पना नहीं कर सकता। प्रत्येक गुरु की यही इच्छा होती है कि उसका शिष्य श्रेष्ठ और कमाऊ नाम और प्रसिद्धि प्राप्त करे लेकिन गुरु कभी भी यश की सफलता और नाम नहीं मांगता और अपने शिष्य पर ध्यान केंद्रित करता है। यही कारण है कि कबीरदास ने गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया है। आज संत महात्मा की वाणी हमें ईश्वर का मार्ग दिखाती है। समय बदल गया है और आगे भी बदल जाएगा लेकिन किसी को भी गुरु का पद नहीं मिला है और न ही कोई इसे ले पाएगा। गुरुकुल से लेकर आधुनिक स्कूलों तक में गुरु का विशेष स्थान रहा है। आज हर क्षेत्र में गुरु आध्यात्मिक, शिक्षा, खेल, साहित्य आदि हैं। महापुरुषों ने कहा है कि यदि किसी को सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले एक अच्छे गुरु की तलाश करनी चाहिए। बिना गुरू शिक्षा के सफलता पाना मुश्किल है। गुरु, गुरु विष्णु, गुरु देव, और कई अन्य किरणों की महिमा का वर्णन करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन वास्तविकता यह है कि गुरु कृपा और अनुग्रह के समानांतर है।

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