रायपुर। दूरस्थ और सीमावर्ती जिला जशपुर की उन आदिवासी महिलाओं को क्या मालूम था कि एक दिन शासन की योजना से जुडऩे के बाद वे आत्मनिर्भर की राह में चल पड़ेंगी और प्रदेश के मुख्यमंत्री से उनका सीधा संवाद ही स्थापित नहीं होगा, बल्कि मुख्यमंत्री भी उनके कार्यों की तारीफ करेंगे। जशपुर जिले में रहने वाली वह चाहे शांता एक्का हो या दिब्या किरण, सरस्वती बाई या फिर अमिषा लकड़ा हो। सभी ने आज मुख्यमंत्री से खूब तारीफ और प्रशंसा बटोरी। जशपुर जिले से अपनी सफलता का राज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बैठे मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को बताते हुए जब एक आदिवासी महिला ने कहा कि गन्ने की फसल लेते हैं, गुड़ बनाते हैं और उसे बेचते हैं। महिला ने मुस्कुराते हुए जब कहा कि इस बार बहुत ज्यादा नहीं बेच पाए क्योंकि लॉकडाउन लग गया था और डर के मारे महिलाएं घर से नहीं निकलीं तो मुख्यमंत्री हंस पड़े और उन्होंने सभी को उनकी उपलब्धि पर वेरी गुड, बधाई, शुभकामनाएं जैसे शब्दों से प्रोत्साहित कर कहा कि शासन की योजनाओं से जो लाभ मिल रहे है, उसे अन्य को भी बताए। आप लोगों को बहुत-बहुत बधाई….। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल कोरोनाकाल में भी प्रदेश के लोगों से लगातार संवाद बनाए हुए हैं। इस कड़ी में आज उन्होंने जब दूरस्थ व आदिवासी जिला जशपुर और रायगढ़ जिले के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया तो शासन की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर की राह पर आगे बढऩे वाले हितग्राहियों, किसानों, ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों से भी संवाद स्थापित किया और उन्हें शाबासी भी दीं। मुख्यमंत्री से शाबासी पाने वालों में कुनकुरी ब्लॉक में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कर उसे बिक्री करने वाले दया स्व-सहायता समूह की श्रीमती अमिषा लकड़ा भी थी। उन्होंने जब मुख्यमंत्री को बताया कि वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कर अभी तक 225 क्विंटल उत्पादन कर 173 क्विंटल की बिक्री भी कर चुकी हैं, इससे 56 हजार 571 रुपए खाते में आए। गोठान के अंतर्गत 20 डिसमील जमीन पर सब्जी के उत्पादन से आठ से 10 हजार रुपए की आमदनी समूह के सदस्यों को हो जाती है। अब वे फूलों की खेती के लिए सोच रही है। मुख्यमंत्री ने इस पर खुशी जताते हुए बधाई दी और कहा कि सब्जियों का उपयोग घर के लिए भी किया करिए। कांसाबेल विकासखण्ड के ग्राम बगिया से रानी स्व-सहायता समूह की श्रीमती सरस्वती बाई ने मुख्यमंत्री को बताया कि कुकुक्ट पालन अंतर्गत वे कड़कनाथ मुर्गे का पालन करती है। अभी 25 हजार रुपए की बिक्री भी हो चुकी है। बाड़ी में सब्जी उत्पादन करने परएक माह में 10 से 12 हजार रुपए तक की आमदनी भी होती है। मनोरा विकासखण्ड से चंद्रमा स्व-सहायता समूह की श्रीमती दिव्या किरण ने बताया कि उनका समूह गन्ने की खेती करता है। गन्ने से गुड़ बनाकर 40 से 45 रुपए में बिक्री करते हैं। अभी 5 क्विंटल गुड़ बेच चुके हैं और आने वाले दिनों में भी गुड़ बनाकर बेचेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कम्पोस्ट का निर्माण कर किसानों को बेचते हैं। इससे भी उन्हें आमदनी होती है। पोरतेंगा की श्रीमती शांता एक्का ने बताया कि वह साल बीज संग्रहण का कार्य करती है। पहले बिचौलिए द्वारा 8 से 10 रुपए किलों में साल बीज खरीद लिया जाता था। अब शासन द्वारा 20 रुपए किलो में साल बीज का क्रय करने से उन्हें दुगना लाभ मिलता है। श्रीमती एक्का ने मुख्यमंत्री का वन धन योजना से वनोपज संग्रहण करने वाले हितग्राहियों के हित में उठाए गए कदम पर आभार जताया। कांसाबेल की कौशल्या विश्वकर्मा बीसी सखी का काम करती है। मुख्यमंत्री से संवाद स्थापित के दौरान जब उन्होंने बताया कि उन्होंने जनवरी 2020 से लेकर अब तक 5 करोड़ 7 लाख रुपए का लेनदेन की है। डेढ़ साल में उन्हें 1 लाख 22 हजार रुपए का कमीशन मिला है। कोविडकाल में बीसी सखी के रूप में किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई दीं। गुलाब स्व-सहायता समूह की श्रीमती मतिल्दा कुजूर ने गौण खनिज से सेनेटरी नैपकीन बनाने की मशीन मिलने के बाद किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि 50 हजार रुपए की आमदनी हो चुकी है। सेनेटरी नैपकीन का एक पैकेट 25 रुपए में बेचती है। आमदनी के आधा हिस्से को मटेरियल की खरीददारी के लिए और आधा को सदस्यों में बंटवारा करती है। वे मशरूम की भी खेती करती है। जिससे दुगनी कमाई हुई है। मुख्यमंत्री ने सभी के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी और अपने कार्यों को प्रचारित करते हुए अन्य महिलाओं को भी जोडऩे के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल से जशपुर जिले की विशेष पिछड़ी जनजाति के किसान श्री लबेना राम ने खेत में शासन की योजना से बोर लगने पर सब्जी सहित मक्का उत्पादन से अच्छी आमदनी होने की बात कही। किसान श्री पलिन्दर सिंह ने बताया कि उन्हें राजीव गांधी किसान न्याय योजना से इस साल 21 हजार 177 रुपए की पहली किश्त मिली है। इस पैसे से वह अपनी फसल को मवेशियों से बचाने के लिए खेत के चारो तरफ फेंसिग लगवा रहे हैं। आने वाले दिनों में खेत में टयूबवेल लगाकर बागवानी करेंगे। फलदार और इमारती लकड़ी वाले पौधे लगाने की भी उनकी योजना है। किसान पलिन्दर सिंह की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा खेत में वृ़क्षारोपण किए जाने पर किसानों को 10 हजार रुपए प्रति एकड़ तीन साल तक दिया जाएगा। इसका लाभ भी उन्हें मिलेगा। कांसाबेल विकासखण्ड के दीपक कुमार भगत ने बताया कि उन्हें 2 एकड़ का वन अधिकार पट्टा मिला है। मनरेगा के तहत डबरी का निर्माण भी हो रहा है। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण योजना के तहत वे पौधारोपण करेंगे। शासन द्वारा संचालित संकल्प शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर डाक्टर बनने का सपना पूरा करने वाले पत्थलगांव के डॉ. भोले भूषण पैकरा ने बताया कि उसका सपना साकार हो गया है। अब वे लोगों का बेहतर इलाज करेंगे। कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद होने पर अपनी मोटर सायकल से गांव-गांव जाकर बच्चों को पढ़ाई कराने वाले शिक्षक श्री वीरेन्द्र भगत ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। उन्होंने बताया कि पढ़ई तुंहर द्वार के तहत विद्यार्थियों को फोन पर भी ऑनलाइन पढ़ाते हैं और होमवर्क देकर तरह-तरह से अभ्यास जारी रखते हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपके द्वारा मोटर सायकल से बच्चों को पढ़ाने का वीडियों मैंने भी देखा था। आपका कार्य सचमुच बहुत सराहनीय है।

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