रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप राज्य में पशुपालन व्यवसाय को लाभकारी बनाने के लिए इनके संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ इनकी नस्लों में सुधार का अभियान संचालित किया जा रहा है। पशुधन विकास विभाग द्वारा गौ वंशीय-भैंस वंशीय पशुओं के नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान का अभियान चलाया जा रहा है, ताकि उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं के प्रजनन से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो और पशुपालकों की आय बढ़ेे। बीते एक वर्ष के दौरान कोरोना संक्रमण काल में राज्य में इस अभियान के तहत 5 लाख 86 हजार गौ वंशीय-भैंस वंशीय मादा पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप एक लाख 92 हजार उन्नत उत्पादित हुए हैं। पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम की वजह से राज्य में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या और दुग्ध उत्पादन को वृद्धि होने लगी है। उल्लेखनीय है कि राज्य में सुराजी गांव योजना के गरूवा कार्यक्रम के तहत पशुधन के संरक्षण और संवर्धन की विशेष पहल की जा रही है। इसके तहत गांवों में अब तक 5600 गौठानों का निर्माण कराया जा चुका है, जहां पशुओं के चारे एवं पानी का प्रबंध और पशु स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। गौठानों में आने वाले पशुओं के लिए हरे चारे का प्रबंध हो सके। इसके लिए अधिकांश गौठानों में चारागाह विकास के तहत हरा चारा भी उगाया जा रहा है, ताकि पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल सके। यहां यह उल्लेखनीय है कि पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम का क्रियान्वयन राज्य के समस्त जिलों में माह अगस्त 2020 से किया जा रहा है। पशुपालकों की जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार का अभियान चलाया जा रहा है। मैत्री योजना के तहत वर्तमान में प्रदेश में 74 नये कार्यकर्ता को प्रशिक्षण दिया गया है। पशुधन विभाग द्वारा नस्ल सुधार की शत्-प्रतिशत सफलता हेतु अक्टूबर-नवम्बर माह में सघन बधियाकरण कार्यक्रम का आयोजन कर नि:कृष्ट सांडो/नाटों का बधियाकरण किया जाता है। विभाग द्वारा 2705 शिविरों का आयोजन कर 3 लाख 35 हजार सांडों/नाटों का बधियाकरण किया गया है। गौ वंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान हेतु निकटस्थ पशु चिकित्सा संस्था से सम्पर्क किया जाए।

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