राजनांदगांव। जनस्वास्थ्य के मामले में बरसात का मौसम परेशानी का कारण न बने, इसके लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है। कोरोना संक्रमण के साथ ही मलेरिया, डेंगू तथा विशेषकर बच्चों को निमोनिया से बचाने हेतु जिलेभर में अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता में रखी गई है। शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि परेशानी आने की स्थिति में पीड़ित को शीघ्र उपचार सुविधा दी जा सके।
कोरोना संक्रमण की गति बहुत हद तक नियंत्रण में होने के बाद भी जिला प्रशासन के दिशा-निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग सतत एहतियात बरत रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण की जांच के साथ ही इससे बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शहर के शंकरपुर इलाके में भी कोरोना जांच की गई। यहां जागरुकता का संदेश देते हुए लोगों से अपील दोहराई गई कि, कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु मॉस्क जरूर लगाएं, स्वच्छता का ध्यान रखते हुए हाथों को समय-समय पर सैनेटाइजर करें तथा आवश्यक सामाजिक-शारीरिक दूरी का अनिवार्यतः पालन करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में कोरोना पर नियंत्रण हेतु टीकाकरण के लिए भी लगातार जोर दिया जा रहा है और इसका सकारात्मक परिणाम साफ दिखने लगा है। जिले में अब तक 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 77.02 प्रतिशत लोगों को टीके का पहला तथा 5.90 प्रतिशत लोगों को दूसरा डोज लगाया जा चुका है। इसी तरह 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 41,145 लोगों को पहला तथा 2,858 लोगों को दूसरा डोज लगाया गया है।
मलेरिया रोधी माह के अंतर्गत मलेरिया व डेंगू सहित अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम करने के लिए भी जिले में अभियान चलाया जा रहा है। जिले के पूरे 1,599 गांव में मच्छररोधी दवा का छिड़काव करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। मौसमी रोगों से बचाव हेतु जनजागरूकता के लिए शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। प्रेरक स्लोगन वाले होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इसी तरह मलेरिया तथा डेंगू से बचाव के लिए प्रति गुरुवार को शहरी एवं बुधवार को ग्रामीण क्षेत्र में सोर्स रिडक्शन एक्टीविटी संपादित की जा रही है। मलेरिया व डेंगू के संभावित प्रकरण पाए जाने पर आवश्यक उपचार प्रदान किया जा रहा है।
बरसात के मौसम में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को पहली प्राथमिकता में रखा गया है। बच्चों को निमोनिया से सुरक्षित रखने हेतु बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिले में बच्चों के लिए न्यूमोकोकल कान्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी) टीकाकरण की शुरुआत की गई है। पीसीवी वैक्सीन क्रमशः छह और 14 सप्ताह उम्र के बच्चों को दी जा रही है। इसके अलावा 9 माह उम्र के बच्चों को बूस्टर डोज दिया जा रहा है। एक वर्ष में जिले के 37,000 पात्र बच्चों के पीसीवी टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। हर सप्ताह मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित किए जाने वाले नियमित टीकाकरण सत्र में जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगवाड़ी केंद्रों में पात्र बच्चों का पीसीवी टीकाकरण निशुल्क किया जा रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा, स्वास्थ्यगत परेशानी के लिहाज से बरसात का मौसम बेहद संवेदनशील होता है। इस मौसम में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है और इसीलिए स्वास्थ्य विभाग लगातार एहतियात बरत रहा है। मौसमी रोगों से बचाव हेतु जनजागरूकता का प्रयास करते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। कोरोना संक्रमण के साथ ही मलेरिया, डेंगू व निमोनिया जैसे रोगों पर नियंत्रण के लिए जिले भर में अभियान चलाए जा रहे हैं तथा अभियान की सतत मानिटरिंग की जा रही है। सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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