छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित वुर्चअल कार्यक्रम में खरीफ फसल को खुले पशुओं द्वारा चराई से बचने के लिए रोका-छेका अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जायेगा जिससे किसानों द्वारा उपार्जित फसलों की रक्षा होगी। मुख्यमंत्री की मंशानुरुप यह योजना अत्यंत सराहनीय है। ऐसा ही एक अभियान मुख्यमंत्री जी को दीगर प्रांतों से आकर यहां बसे परदेशिया लोग भी मूल छत्तीसगढिय़ों के हक को चर रहे है, के लिए भी चलाया जाना चाहिये। याने कि छत्तीसगढ़ राज्य में दीगर राज्यों से यहां आकर यहां के लोगों को रोकने-छेकने जैसे अभियान चलाने की जरुरत हैं। क्योंकि बीते ढाई साल के कार्यकाल में मूल छत्तीसगढिय़ों का विकास होता नहीं दिख रहा है, हर जगह गैर छत्तीसगढिय़ों का बोलबाला है। वर्ष दिसंबर 2018 में छत्तीसगढ़ को ठेठ छत्तीसगढिय़ा मुख्यमंत्री मिला, इसके बाद राज्य के मूल छत्तीसगढिय़ों को लगने लगा था कि अब उनका विकास होगा लेकिन बीते ढाई साल में ऐसा विकास होता नहीं दिख रहा है जिस प्रकार से होना चाहिये। छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढिय़ा सरकार आने के बाद छत्तीसगढिय़ों के जीवन में कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। इसका मूल कारण यह है कि यहां धीरे-धीरे परदेशियावाद हावी होता जा रहा है जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। यहां प्राय: देखने को मिल रहा है यहां के मूल छत्तीसगढिय़ों को वैसे रोजगार के अवसर प्राप्त नहीं हो रहे है जैसे होने चाहिये। आपको बताना चाहेंगे ये परदेशिया लोग छत्तीसगढ़ राज्य को अपराधगढ़ बनाने से भी नहीं चूक रहे हैं। अक्सर अपराध की खबरों में ज्यादातर अपराधों में परदेशिया लोगों की संलिप्तता रहती है। छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जाते है और खुलासा होने के बाद जब पता चलता है तो ये परदेशिया अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होते है। इसलिए छत्तीसगढ़ में दीगर प्रांतों से गलत मंशा लेकर आने वाले परदेशियों को रोकने-छेकने के लिए रोका-छेका अभियान चलाया जाना चाहिये जिससे सही ढंग से मूल छत्तीसगढिय़ों का विकास हो सके।
