रायपुर। छत्त्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के भीतर इन दिनों सामाजिक चुनाव को लेकर गदर मचा हुआ है। जहां एक तरफ चुनाव को लेकर समाज दो गुटों में बंटता नजर आ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ समाज के संरक्षकगण मुक-बधिर की भांति बैठे हुए है। किसी समाज के संरक्षक का दायित्व होता है कि वे समाज की संरक्षा करें और समय-समय पर समाज को संगठित करने की दिशा में पहल करें, लेकिन यहां जो देखने को मिल रहा है वो एकदम उलट है, यहां चुनाव को लेकर समाज दो गुटों में बंटता नजर आ रहा है और समाज के संरक्षकगण तमाशा देख रहे हैं, ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर कहां है कुर्मी समाज के मूक-बधिर संरक्षकगण…? उल्लेखनीय है कि पिछले तीन चुनाव में किसी ना किसी कारण से विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रही है। पिछले सामाजिक चुनावों पर नजर डालेंगे तो पायेंगे कि सामाजिक चुनाव में अव्यवस्था का हवाला देकर चुनाव स्थगित कर दिया गया था। अब जब समाज चुनाव को लेकर दो गुटों में बंटता जा रहा है तब वही संरक्षक मूक-बधिर के भांति चुपचाप बैठे हुए है, इस संबंध में अब उनके तरफ से कोई बयान नहीं आया है। आपको बता दें कि जब कुर्मी समाज के चुनाव की अधिसूचना जारी की गई थी उस समय पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कोरोना काल में ही संपन्न कराये गये। लेकिन कोरोना काल का हवाला देकर कुर्मी समाज के चुनाव को स्थगित कर दिया गया। 4 अप्रैल का चुनाव स्थगित होने के बाद फिर से चुनाव कराने के लिए 16 जून को जिला प्रशासन के पास फिर से आवेदन दिया गया, जिसमें फिर से कोरोना का हवाला देते हुए जिला प्रशासन द्वारा चुनाव की अनुमति नहीं देते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया। और जिला प्रशासन के इसी आदेश को लेकर समाज का एक गुट द्वारा अब चार माह तक के लिए चुनाव को टाल दिया गया। जबकि दूसरा गुट का कहना है कि अभी वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा भी कहा गया है कि अभी कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी कम है, इसको देखते हुए कोरोना नियमों का पालन करते हुए सामाजिक चुनाव कराया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा समाजिक चुनाव के संबंध में दिये गये आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कंडिका क्रमांक 01 (3) रायपुर जिला अंतर्गत सभी प्रकार की सभा, रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन तथा राजनैतिक, खेल, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन आगामी आदेश पर्यंत पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है। जिसके कारण वर्तमान में सामाजिक चुनाव कराये जाने की अनुमति दिया जाना संभव नहीं है। अब यहां पर यह सवाल उठता है कि जब रायपुर जिले में कंडिका क्रमांक 01 (3) रायपुर जिला अंतर्गत सभी प्रकार की सभा, रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन तथा राजनैतिक, खेल, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन आगामी आदेश पर्यंत पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है का हवाला देकर सामाजिक चुनाव संबंधी आवेदन को निरस्त कर दिया गया तो क्या जिला प्रशासन ने कांग्रेस-भाजपा को राजधानी में धरना-प्रदर्शन के लिए विशेष अनुमति दी थी? कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जिस तरीके से वर्तमान में जो रवैया देखने को मिल रहा है उससे तो ऐसा लगता है कि शायद समाज का एक गुट चुनाव कराने के मूड में ही नहीं है? और जो दूसरा गुट है वो कोरोना नियमों का पालन करते हुए चुनाव कराये जाने की बात कह रहा है। खैर यह तो भविष्य बतायेगा कि कुर्मी समाज का चुनाव हो पाता है या नहीं, लेकिन चुनाव को लेकर दो गुटों में बंटते समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए अब समाज के संरक्षकगणों को भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सामने आना चाहिये, ना कि अपनी निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए समाज का बेजा उपयोग करना चाहिये…?
