राजनांदगांव। मलेरिया, डेंगू एवं मच्छरों से होने वाले अन्य रोगों की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन के दिशा-निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। मच्छरों से होने वाले रोगों से लोगों को बचाया जा सके, इस उद्देश्य से जिले के गांवों में मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। जन-जागरुकता के लिए गांव-गांव में रैली निकाली जा रही है तथा मच्छरदानी वितरण भी किया जा रहा है। लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी के निर्देशन में जून माह को जिले में मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाया गया। इसके अंतर्गत जिले भर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रोगों से बचाव हेतु जन-जागरुकता के लिए बैनर-पोस्टर व होर्डिंग्स लगाए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जागरूकता रैली व नाटक का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में मलेरिया कार्यक्रम की जिला सलाहकार संगीता पांडेय ने बताया, मलेरिया, डेंगू व डायरिया पर नियंत्रण और इससे बचाव के लिए जिला स्तर पर 371 सर्वे दल का गठन किया गया है, जिनके द्वारा गृह भेंटकर मास स्क्रीनिंग की जा रही है। वहीं शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सोर्स रिडक्शन एक्टीविटी संपादित की जा रही है। इसके तहत संवेदनशील वार्डों एवं अन्य समस्त शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टेमीफास का छिड़काव किया जा रहा है। मलेरिया रोधी कार्यक्रम में मितानिन को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। विभिन्न स्थानों पर वह गृह भेंटकर विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों को मलेरिया व डेंगू की रोकथाम तथा इससे बचाव के तरीके बता रही हैं। साथ ही पाम्पलेट वितरण किया जा रहा है। मलेरिया व डेंगू के संभावित प्रकरण पाए जाने पर पीड़ित को आवश्यक उपचार प्रदान किया जा रहा है। मितानिन कार्यक्रम की जिला समन्यवक सुमन चौधरी ने बताया, गुजरे एक-दो साल में जिस क्षेत्र में मलेरिया के ज्यादा मामले मिले हैं, उन स्थानों की सूची बनाई जा रही है। यह कार्य जनभागीदारी से किया जा रहा है। इसके बाद मलेरिया, डेंगू व डायरिया से बचाव हेतु हरसंभव उपाय शुरू किए जाएंगे। इस दौरान लोगों को घर में रखे गमले की ट्रे, कूलर, फ्रिज तथा पानी की टंकी को खाली कर सुखाने के बाद उपयोग करने के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि मच्छर के अंडे, लार्वा को नष्ट किया जा सके। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए पुराने टायर, मटके, कबाड़ आदि में बरसात का पानी एकत्र न होने देने तथा घर के बाहर छोटे गड्ढों में मिट्टी का भराव करने हेतु लोगों को प्रेरित किया जाएगा, जिससे मच्छरों के प्रजनन को न्यून किया जा सके। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया, मलेरिया के साथ ही मच्छर काटने से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले के संवेदनशील गांवों में मच्छरदानी का वितरण किया जा रहा है। साथ ही जनसमुदाय को मच्छरदानी का उपयोग करने, फुल बाजू के कपड़े पहनने व घर के आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी तरह विकासखंड के ग्राम स्तर पर मास स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत सर्वे दल के द्वारा 2 मलेरिया वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) से अधिक के 199 संवेदनशील गांवों तथा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश के सीमा क्षेत्र के सभी गांवों, सीआरपीएफ, आईटीबीपी कैम्प, पुलिस चौकी एवं अन्य स्थानों पर मास स्क्रीनिंग की जा रही है। जनसमुदाय की शत-प्रतिशत रक्त जांच का भी लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान मलेरिया के सकरात्मक प्रकरण पाए जाने पर पीड़ित को संपूर्ण उपचार प्रदान किया जाएगा।

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