नाग पंचमी का पर्व कल है। इस दिन मुख्य रूप से नाग की देवता पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग दिन भर व्रत रखते हैं और सांपों की पूजा करते हैं और उन्हें दूध पिलाते हैं। दरअसल, नाग को आदि देव भगवान शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता हरि विष्णु की शैय्या माना जाता है। इसके अलावा नागों का लोगों के जीवन से भी नाता है। सावन के महीने में हमेशा जमकर बारिश होती है और इस वजह से नाग जमीन से निकलकर बाहर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा की जाए तो वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यही नहीं कुंडली दोष दूर करने के लिए भी नाग पंचमी का अत्यधिक महत्व है। नाग पंचमी का त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। पौराणिक काल से ही नागों को देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग पूजन का बहुत महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सर्पों को दूध से स्नान और पूजन कर दूध से पिलाने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है।
नाग पंचमी का महत्व
1- हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्पों को पौराणिक काल से ही देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग पूजन का अत्यधिक महत्व है।
2- ऐसी भी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने वाले व्यक्ति को सांप के डसने का भय नहीं होता।
3- ऐसा माना जाता है कि इस दिन सर्पों को दूध से स्नान और पूजन कर दूध से पिलाने से अक्षय-पुण्य की प्राप्ति होती है।
4- यह पर्व सपेरों के लिए भी विशेष महत्व का होता है। इस दिन उन्हें सर्पों के निमित्त दूध और पैसे दिए जाते हैं।
5- इस दिन घर के प्रवेश द्वार पर नाग चित्र बनाने की भी परम्परा है। मान्यता है कि इससे वह घर नाग-कृपा से सुरक्षित रहता है।
नग पंचमी के दिन भूलकर भी न करें ये काम
मान्यता है कि इस दिन जमीन की खुदाई नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा नागपंचमी के दिन धरती पर हल भी नहीं चलाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सुई में धागा भी नहीं डालना चाहिए। वहीं इस दिन आग पर तवा और लोहे की कढ़ाही चढ़ाना भी अशुभ माना गया है। नागपंचमी पूजा और व्रत के आठ नाग देव माने गए हैं- अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक अष्टनागों की पूजा की जाती है। नागपंचमी पर वासुकि नाग, तक्षक नाग और शेषनाग की पूजा का विधान है। मान्यता के मुताबिक इस दिन सर्पों की पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और काल सर्प दोष से ग्रसित जातकों को इस दोष से मुक्ति से मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उन्हें तो विशेष तौर पर नागपंचमी को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के साथ नागदेव की अराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। लेकिन नागदेव की प्रमिता का पूजन मंदिर या घर में ही करना चाहिए। इसके अलावा जीवित सांप को दूध न पिलाकर प्रतिमा पर ही दूध अर्पित करना शुभ माना गया है। इसके पीछे का कारण है कि सांप मांसाहारी होते हैं। ये जीव दूध नहीं पीता है। सांप के लिए दूध जहर समान होता है। जिससे उसकी मृत्यु हो सकती है।
नाग पंचमी की पूजा विधि
नाग पंचमी व्रत के लिए तैयारी चतुर्थी के दिन से ही शुरू हो जाती हैं।चतुर्थी के दिन एक समय भोजन करें।इसके बाद पंचमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।पूजा के लिए नागदेव का चित्र चौकी के ऊपर रखें।फिर हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें। कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर लकड़ी के पट्टे पर बैठे सर्प देवता को अर्पित करें।पूजा के बाद सर्प देवता की आरती उतारी उतारें।अंत में नाग पंचमी की कथा अवश्य सुनें। वैसे तो सावन के महीने का हर दिन भगवान भोलेशंकर का दिन होता है। पूरे महीने कृपानिधान शिव शंकर कृपा बरसाते हैं लेकिन इस दिन नागपंचमी का दिन बेहद ही खास है क्योंकि इस दिन भगवान आशुतोष का प्रिय आभूषण उनके गले का हार यानि नाग देवता की पूजा करके आप अपनी हर मनोकामना को पूरा कर सकते हैं। यही नहीं यदि आप कालसर्प दोष से ग्रसित हैं तो इस दिन उसका भी निवारण किया जा सकता है। नाग की पूजा से महादेव जल्द प्रसन्न होते हैं और आपके जीवन की हर बाधाओं को दूर कर देते हैं।
