“वादा के सुरता म-मुख्यमंत्री निवास घेराव” कार्यक्रम के अंतर्गत छात्तीसगढ़ संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ 2018 की भांति एक विशालकाय जम्बो प्रदर्शन करने जा रहा है। कोरोनकाल में जहाँ कई अनियमित कर्मचारियों का शासन के कार्य करते हुए मृत्यु हो गयी वही इस विषम परिस्थिति हज़ारो के तादाद में सेवा से पृथकीकरण होगया। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रभारी सूरज सिंह ठाकुर ने बताया कि, वर्तमान में कांग्रेस सरकार के अंतर्गत विभिन्न विभागों के आला अफसर बिल्कुल बेलगाम के साथ निरंकुश हो चुके है, और अनियमित कर्मचारियों के विरुद्ध कुछ भी आदेश जारी कर दिया जा रहा है, जिससे एक ओर नियमितीकरण का स्वप्न देख रहे अनियमित कर्मचारी एक तरफ सशंकित तो है ही और साथ मे अब लालफीताशाहियों के साथ सरकार के विरुद्ध बहुत आक्रोशित भी होचुके है। आगे इस कड़ी में बताया गया कि, महासंघ की प्रबंध कार्यकारिणी लगातार मुख्यमंत्री से संवाद टेबल टॉक इत्यादि हेतु पत्राचार करते रहे, बावजूद इसके जन घोषणा पत्र के बहुप्रतीक्षित मांग नियमितीकरण, छटनी नही किये जाने, सेवा में बहाली तथा आऊटसोर्सिंग पूर्णतः बन्द किये जाने के विषयों में सरकार उदासीन रवैया अपनाते हुए नज़र आ रही है। प्रदेश सचिव श्रीकांत लास्कर एवं कार्यक्रम सह प्रभारी ने बताया कि अनियमित महासंघ के प्रदेश भर के अनियमित पदाधिकारी एवं पौने दो लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी उनकी अनदेखी एवं अनसुनी के लिए पूरी तरह से मायूस हो गए है। प्रदेश के सरकार के कई जन प्रतिनिधियों ने जहां अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण किये जाने को जायज बताते हुए अनुशंसा पत्र प्रदेश के मुखिया के नाम भेजा है वही दूसरी तरफ प्रदेश के प्रशासकीय अधिकारियों द्वारा सीधी भर्तियां निकाल कर, अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का हक उनसे छीनते हुए अन्य संवर्गो को उपहार देने के कोशिश में जुटी हुए है। प्रदेश अध्यक्ष रवि गढ़पाले के बयान के अनुसार वर्तमान सरकार का अनियमित कर्मचारियों के प्रति ढुलमुल रवैया शुरुवात से ही रहा है, जहां सरकार बनते ही 10 में नियमितीकरण किये जाने की बात हुई थी, वही आगे चल कर ये साल किसानों का अगले वर्ष कर्मचारियों के बोल में बदल गया, और अब वैश्विक महामारी कोरोना के आड़ में सरकार नियमितीकरण के घोषणा को पूरा करने से पीछे हटती नजर आ रही है।
प्रदेश पूर्व संयोजक एवं वरिष्ठ सदस्य गोपाल साहू एवँ संजय सोनी कार्यकारी अध्यक्ष कबीरधाम ने तो स्पष्ट वक्तव्य दिया है, की अब सरकार और उसके लालफीताशाह जानबूझ कर अनियमित कर्मियों के मांगो को दबाते जा रहे है, बार बार सिर्फ संख्यात्मक जानकारी एकत्रित किये जाने का पत्र चलवा कर सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है, जिससे अनियमित कर्मचारियों में बेहद आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। अब वे और महासंघ के अन्य पदाधिकारी मिलकर 17 सितम्बर से 36 घण्टे का आमरण अनशन के मुहिम को चालू करेंगे, और इस 36 घण्टे के आंदोलन में महासंघ के द्वारा वृहद घटनाक्रमो को दोहराते हुए मुख्यमंत्री को वादा के सुरता दिलाये बर निवास का घेराव किया जावेगा और नियमितीकरण हासिल करने का हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अजित सदन नाविक का भी कड़क बयान आया है, उन्होंने कहा कि अनुनय निवेदन आवेदन बहुत हुआ, कांग्रेस सरकार बनाने में अनियमित कर्मचारियों और उनके परिवार का प्रमुख हाथ था, अब जब वादा खिलाफी हो रही है तो वादा के सूरता म एवं मुख्यमंत्री निवास घेराव कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 28 जिलों से हज़ारो के तादाद में 17 सितम्बर से रायपुर राजधानी में एकत्रित होकर जंगी प्रदर्शन करेंगे। महासंघ के सक्रिय साथी टीकम चंद कौशिक एवं ताकेश्वर साहू ने बताया कि पूरे प्रदेश से करीब 3 दर्जन से अधिक अनियमित कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों से महासंघ को नैतिक और भौतिक समर्थन प्राप्त हो चुका है और आगामी 2 दिवस के अंदर लगभग सभी विभागों और योजना के संगठनों का भी समर्थन महासंघ को प्राप्त हो जाएगा।

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