रायपुर। छत्तीसगढ़ के सवा लाख और मध्य प्रदेश के साढ़े चार लाख पेंशनर की महंगाई राहत बढ़ाने के लिए दोनों सरकारों को राज्य विभाजन के 21 वर्षो के बाद भी महंगाई राहत व अन्य सभी प्रकार आर्थिक स्वत्वों के भुगतान में आपसी सहमति का इंतजार करना पड़ता है।इसी का परिणाम है कि राज्य के पेंशनरों को केन्द्र के समान महंगाई राहत देने में कोताही बरती जा रही है। इसी महीने छत्तीसगढ़ में पेंशनरों को महंगाई राहत के जारी आदेश में मध्यप्रदेश शासन के सहमति को आधार बनाकर पहली बार राज्य में कर्मचारियों को देय महंगाई भत्ता की तिथि जुलाई 21 के स्थान पर अक्टूबर 21 से दिया गया है। जिसके कारण राज्य के पेंशनरों में रोष है और वे धारा 49 को हटाने की एक सूत्रीय मांग को लेकर 3 जनवरी को मंत्रलय का घेराव करने जा रहे हैं। उक्त जानकारी जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ राज्य संयुक पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने दी है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है मध्यप्रदेश विधानसभा में अशासकीय संकल्प पारित होने के बाद अब गेंद छत्तीसगढ़ शासन के पाले में हैं क्योंकि ऐसा बताया जा रहा है कि अब छत्तीसगढ़ विधानसभा में निर्णय पारित होने पर प्रकरण को अंतिम मुहर कि ब्यूरोक्रेसी के अनुसार मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) में इसका प्रविधान है। इसे समाप्त करने के लिए शुक्रवार 24/12/21 को मध्यप्रदेश विधानसभा के अंतिम दिन विधानसभा में भाजपा के विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने अशासकीय संकल्प प्रस्तुत किया, जिसे शोरगुल के बीच बिना चर्चा पारित कर दिया गया। अब शासन इसके आधार पर कार्यवाही करेगा। लेकिन में छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में ही इस पर कार्यवाही सम्भव दिखाई दे रहा है। जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि गत 27 अक्टूबर को मंत्रालय में आयोजित पिंगुआ कमेटी की बैठक में धारा 49 पर चर्चा के दौरान वित्त सचिव ने कहा था कि धारा 49 को समझने के लिये अलग से बैठने की जरूरत है इसलिए इस पर चर्चा के लिये समय लेकर मुझसे मिले।परन्तु मोबाइल और दूरभाष और मंत्रालय में भी जाने के बाद उनकी व्यस्तता हमारे आड़े आ रही है। उन्हें लिखकर देने बाद भी वे पेंशनरों को मिलने का समय नहीं दे रही हैं। इसपर भी पेन्शनर संग़ठन ने नाराजगी जाहिर किया है।

