दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नवजात शिशुओं को खरीदने और बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं. यह गिरोह गरीब तबके के लोगों से नवजात बच्चों को पैसे देकर खरीदता था और नि:संतान लोगों को मोटी रकम में बेच देता था.

गिरोह की छह महिला सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है.

17 दिसम्बर को एसआईयू-द्वितीय अपराध शाखा वेलकम दिल्ली आफिस में सूचना मिली कि नवजात शिशुओं के अपहरण और तस्करी में शामिल एक गिरोह सक्रिय है. गिरोह के कुछ सदस्य गांधी नगर के श्मशान घाट के पास पहुंचने वाले हैं. ये लोग करीब 3:30 बजे एक नवजात शिशु को बेचने के लिए वहां पहुंचेंगे.

सूचना पर एक टीम गठित कर छापेमारी की गई. छापेमारी के दौरान प्रिया जैन, प्रिया और काजल उर्फ ​​कोमल नाम की तीन महिलाओं को मौके से पकड़ा गया, जो अपने साथ लगभग 7-8 दिन की उम्र के एक नवजात बच्चे (लड़के) को लेकर आई थीं. बच्चे को बेचने के लिए ये लोग पहुंचे थे. पूछताछ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वे पैसे कमाने के लिए ये काम करते हैं, बच्चे की व्यवस्था प्रियंका नाम की महिला ने की थी, जो प्रिया की बड़ी बहन है.

इसके बाद 17 और 18 दिसंबर 2021 को गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. उनके कब्जे से एक और बच्ची बरामद की गई, जिसे उन्होंने एक दलाल के माध्यम से खरीदा था. इस बच्चे को भी बेचने की तैयारी में थे. गिरफ्तार महिलाओं में प्रिया जैन, प्रिया, काजल, रेखा, शिवानी और प्रेमवती शामिल हैं.

पूछताछ में पता चला कि महिलाओं ने शुरू में आईवीएफ केंद्र की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने के लिए अपने ‘अंडे’ डोनेट करना शुरू कर दिया. इसके बदले में 20000 से 25000 रुपये तक मिले. इस दौरान ये महिलाएं कई लोगों के संपर्क में आईं, जिनके कोई संतान नहीं थी. ऐसे लोग भी जो आईवीएफ के माध्यम से भी बच्चा नहीं पा सकते थे.

गरीब महिलाओं को लालच देकर खरीदते थे बच्चा

काजल कई महिलाओं को ‘अंडे’ डोनेट करने के लिए आईवीएफ सेंटर ले जाती थी. इसमें कमीशन लेती थी. इसी दौरान उसने एक बड़ा नेटवर्क बनाया, जो अपने अंडे दान करने के लिए तैयार थे. कई गरीबों को पैसे का लालच दिखाकर बच्चे को बेचने के लिए राजी करना शुरू कर दिया. गरीब लोगों ने बच्चों को बेचना शुरू कर दिया. आरोपियों ने बेचने और खरीदने वालों को भी आश्वस्त किया कि यह अवैध नहीं है. कुछ मामलों में उन्होंने नोटरीकृत दस्तावेज भी बनवाए, जिसमें यह लिखा गया कि बच्चे को कानूनी रूप से किसने गोद लिया. तीन लाख तक में बच्चे बेचे जाते थे.

सौदा करने के लिए वॉट्सएप पर भेजते थे बच्चे की फोटो

वॉट्सएप के माध्यम से दलालों के बीच बच्चे की फोटो भेजी जाती थी. इसके बाद सौदा किया जाता था. काजल और प्रियंका गिरोह की मास्टरमाइंड हैं. यह भी पता चला है कि इन आरोपियों का नेटवर्क अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है. फरार प्रियंका को छोड़कर सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं. शेष आरोपियों को गिरफ्तार करने और नवजात शिशुओं की तस्करी में शामिल पूरी चेन का भंडाफोड़ करने का प्रयास किया जा रहा है. मामले में दो नवजात शिशुओं को बरामद किया गया है, जबकि आरोपी व्यक्तियों द्वारा बेचे गए 10 बच्चों की पहचान की गई है.

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