किसी देश या राज्य के जीवन स्तर का अंदाजा वहां के निवासियों द्वारा की जाने वाली विद्युत खपत के देखकर लगाया जाता है। विकसित देशों में प्रति व्यक्ति विद्युत की खपत बहुत ज्यादा होती है। देश में पावर हब की पहचान बना चुके छत्तीसगढ़ में लगातर प्रति व्यक्ति विद्युत खपत में बढ़ोत्तरी हो रही है। नई राज्य सरकार ने यहां के लोगों के जीवन स्तर में तेजी से बदलाव और विद्युत सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए विद्युत अधोसंरचना को न सिर्फ मजबूत बनाया है, वहीं आम जन के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता भी सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का कहना है कि राज्य के संसाधनों का लाभ प्रदेशवासियों को मिलना चाहिए। छत्तीसगढ़ में मौजूद कोयले के विपुल भण्डार पर आधारित ताप बिजली संयंत्रों की श्रृंखला प्रदेश में स्थापित की गयी है, जिसके बदौलत देश के बिजली हब की पहचान प्रदेश को मिली है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने हॉफ बिजली बिल योजना लागू कर 400 यूनिट बिजली आधे रेट में देने की व्यवस्था की है। इस योजना ने लोगों को महंगाई के इस दौर में राहत देने के साथ प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में वृद्धि दर्ज करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने के संकल्प को पूरा करने के लिए न केवल विद्युत अधोसंरचना को मजबूत बनाने की पहल की गई है बल्कि किसानों, उद्योगों को भी विद्युत की दरों में रियायत दी जा रही है। इन सबका परिणाम यह हुआ कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का पहिया तेज गति से घूम रहा है। कोरोना संकट काल में उद्योगों को दी गई रियायत के फलस्वरूप उद्योगों को काफी राहत मिली।   

 राज्य में नई सरकार के गठन के बाद अपने घोषणा पत्र में किए गए वायदे के अनुरूप मार्च 2019 से हाफ बिजली बिल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को जीवन स्तर में परिवर्तन आया है। इस योजना में घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की बिजली की खपत पर बिजली बिल की राशि में विद्युत दर पर आधी छूट दी जा रही है। इस योजना में लगभग 40 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 2222 लाख रूपए की छूट अब तक दी गई है। पिछले तीन सालों में विद्युत वितरण कम्पनियों ने नागरिक सेवाओं में भी काफी सुधार किया है। मोर बिजली एप के माध्यम से विद्युत देयकों के भुगतान तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। इस नई सुविधा का लाभ लगभग 60 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को मिल रहा है। इसके अलावा अत्याधुनिक केन्द्रीकृत काल सेन्टर भी बनाया गया है।

        किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगभग 5 लाख 81 हजार पम्पों का ऊर्जीकरण किया गया है। पिछले तीन वर्षों में 60 हजार स्थाई कृषि पम्पों का ऊर्जीकरण किया गया है। इसके अलावा छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए 3 अश्व शक्ति के पम्पों पर 6000 यूनिट और 3-5 अश्वशक्ति के पम्पों पर सालाना साढे 7 हजार यूनिट की छूट दी जा रही है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए निःशुल्क विद्युत सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। विद्युत अधोसंरचना के विकास के लिए राज्य में पिछले तीन वर्षों में 33/11 के.व्ही. के 117 विद्युत केन्द्रों की स्थापना की गई है। इसी प्रकार 1517 किलोमीटर 33 केव्ही. विद्युत लाइन, 16380 किलोमीटर 11 केव्ही लाइन, 29088 किलोमीटर निम्न दाब लाइन, इसी प्रकार 11/04 केव्ही के 41,451 विद्युत उप केन्द्र बनाए गए हैं। राज्य के 1798 स्कूलों का विद्युतीकरण भी किया गया है।

          मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना में 14 नगर निगम क्षेत्रों में विद्युत लाइनों को व्यवस्थित करने और नए क्षेत्रों में विद्युत सुविधाएं पहुंचाने आदि के 1985 काम पर 66 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है। मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना में 169 करोड़ की लागत से 3397 कार्य पूर्ण किए गए हैं। केन्द्र सरकार की रीवैम्पड डिस्ट्रीव्यूशन सेक्टर स्कीम में ट्रांसमिशन में होने वाली हानि को रोकने और स्मार्ट मीटर लगाने के लिए लगभग 9640 करोड़ रूपए की कार्ययोजना तैयार की गई है।

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