बुधवार शाम से लेकर गुरुवार सुबह तक किसी भी वक्त सूरज से आ रही धधकती ऊर्जा पृथ्वी से टकरा सकती है। सूर्य से यह ऊर्जा वहां हुए भयानक विस्फोट की वजह से पैदा हुई है। वैज्ञानिक बता रहे हैं कि इसकी वजह से पृथ्वी पर भू-चुंबकीय तूफान पैदा हो सकता है और अमेरिका के नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडिमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) ने इस संबंध में चेतावनी भी जारी कर दी है। सूरज की सतह पर यह महाविस्फोट 30 जनवरी को हुआ था और इसकी वजह 23,83,200 किलोमीटर प्रति घंटे की अनुमानित रफ्तार से कोरोनल मास इजेक्शन उससे निकलकर पृथ्वी और दूसरे ग्रहों की दिशा में बढ़ चला है।
सूर्य पर हुआ विस्फोट, कुछ ही घंटों में धरती से टकराएगा
सूरज पर हुए एक शक्तिशाली विस्फोट की वजह से एक सौर चुंबकीय तूफान पैदा हुआ है, जिसके बुधवार को धरती से टकराने की आशंका है। यह विस्फोट सूर्य के विशाल सनस्पॉट क्षेत्र एआर2936 में हुआ है, जो कि पिछले कुछ हफ्तों में बहुत ही विशाल हो चुका है, और उससे कोरोनल मास इजेक्शन(सीएमई) पैदा हो रहा है, जो धरती की ओर बढ़ता चला आ रहा है। कोलकाता स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के अधीन आने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज ने अनुमान लगाया है कि सूरज से चला कोरोनल मास इजेक्शन(सीएमई) 2 फरवरी को देर शाम से लेकर 3 फरवरी की सुबह तक पृथ्वी पर पहुंच सकता है। इंस्टीट्यूट के मुताबिक इसके प्रभाव की गति साधारण रहने का अनुमान है। हालांकि, हम न्यूनतम से मध्यम विचलन की उम्मीद कर सकते हैं।
सूरज के पृथ्वी से भी विशाल सतह पर हुआ है विस्फोट
बीते 30 जनवरी को एक एम1 क्लास सोलर फ्लेयर के जरिए यह कोरोनल मास इजेक्शन अंतिरक्ष की ओर बढ़ चला है। यह सोलर फ्लेयर करीब 4 घंटों तक रहा, जिसकी वजह से पृथ्वी समेत दूसरे ग्रहों की ओर अंतरिक्ष के निर्वात में उससे निकले पदार्थ धकेला गया है। इसकी वजह से अगर यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराता है तो मध्यम दर्जे के शक्तिशाली जी-2 क्लास के भू-चुंबकीय तूफान पैदा होने की संभावना है। सूर्य के सनस्पॉट क्षेत्र एआर2936 से जो विशाल धधक निकली है, वह नए सोलर साइकल में सूरज की सतह का सबसे सक्रिय क्षेत्र है। यह सनस्पॉट इतना विशाल है कि उसमे पूरी धरती समा सकती है।
कोरोनल मास इजेक्शन क्या है ?
कोरोनल मास इजेक्शन सूरज की सतह पर होने वाला सबसे विशाल विस्फोट है, जिससे अरबों टन पदार्थ निकलकर लाखों मील प्रति घंटे की रफ्तार से अंतरिक्ष में फैल सकते हैं। जाहिर है कि इस सौर सामग्री के रास्ते में जो भी ग्रह, अंतरिक्ष यान या उपग्रह आएंगे, ये उन सबको प्रभावित कर सकता है। अगर कोई शक्तिशाली कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है तो यह हमारे तमाम सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकता है और पृथ्वी के तमाम रेडियो संचार नेटवर्क को बाधित कर सकता है। यह घटना सनस्पॉट एआर2929 पर हुए विस्फोट के कुछ ही हफ्ते बाद हो रही है, जिसकी वजह से पृथ्वी का वायुमंडल प्रभावित हुआ था और हिंद महासागर के आसपास शॉर्टवेव रेडियो ब्लैकआउट हो गए थे।
सूर्य में विस्फोट की स्थिति कहां पैदा होती है ?
सोलर फ्लेयर की घटनाएं आमतौर पर सूरज के सक्रिय क्षेत्रों में होती है, इन इलाकों मजबूत चुंबकीय क्षेत्र मौजूद होता है और यह खास सनस्पॉट ग्रुप से जुड़े होते हैं। जैसे-जैसे ये चुंबकीय क्षेत्र विकसित होते जाते हैं, एक समय में आकर वे अस्थिरता के बिंदु तक पहुंच सकते हैं और फिर विभिन्न रूपों में इससे असीम ऊर्जा प्रवाहित कर सकते हैं।
क्या इसकी वजह से भू-चुंबकीय तूफान आएगा ?
यदि कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी से टकराता है तो भू-चुंबकीय तूफान पैदा हो सकता है। अमेरिका स्थित स्पेस वेदर प्रीडिक्शन सेंटर जो कि नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडिमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अधीन आता है, उसने इस बार जी2 (मध्यम) भू-चुंबकीय तूफान उठने की संभावना को देखते हुए चेतावनी जारी की है।
23,83,200 किलोमीटर प्रति घंटे की अनुमानित रफ्तार
एजेंसी ने कई विश्लेषणों के आधार पर 23,83,200 किलोमीटर प्रति घंटे की अनुमानित कोरोनल मास इजेक्शन का संकेत दिया है। एजेंसी के मुताबिक ‘सीएमई के आने का एनओएए डीएससीओवीआर स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी पर पहुंचने से पहले (करीब 10 लाख मील दूर रहने पर) ही पता लगा लेगा। किसी भी भू-चुंबकीय तूफान की स्थिति कमजोर रहने पर 3 फरवरी तक जारी रहने की संभावना है। इसलिए, एक जी1 (लघु) भू-चुंबकीय तूफान 03 फरवरी को प्रभावी रह सकता है।

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