कृषि विद्यार्थियों के लिए कैरियर की संभावनाओं पर एक दिवसीय वेबिनार
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कैरियर डेवलपमेंट सेन्टर द्वारा ‘‘कृषि स्नातकों के लिए कैरियर के अवसर और कौशल विकास’’ पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में आयोजकों एवं छात्रों सहित लगभग 30 लोगों ने आॅफलाइन भाग लिया एवं 100 छात्र-छात्राएं आॅनलाइन मोड से सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.एस. सेंगर ने कहा कि कैरियर डेवलपमेंट सेंटर द्वारा कृषि विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसरों एवं कौशल विकास पर सराहनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण काल में वेबिनारों के माध्यम से विद्यर्थियों को कैरियर विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि छात्रों के लिए विदेशों में भी रोजगार के असीमित अवसर उपलब्ध हैं। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. जी.के. श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए छात्रों को इस वेबिनार के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। दी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाॅ. एस.एस. टुटेजा ने कार्यक्रम का परिचय दिया एवं उन्होंने जाॅब फेयर तथा छात्रों को प्लेसमेंट सेल द्वारा नौकरी एवं स्टार्टअप स्थपित करने हेतु मिलने वाले वित्तीय सहयोग के बारे में बताया।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डाॅ. गजेन्द्र चंद्राकर ने आॅनलाइन एवं आॅफलाइन मोड से जुड़े छात्र-छात्राओं को छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती, उसके प्रसंस्करण और विपण पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया। उन्होंने मखाना की खेती के तरीके, व्यवहार्यता, मखाना का जीवन चक्र, मखाना में कीट प्रबंधन एवं भारत द्वारा विश्व बाजार में मखाना के आपूर्ति की हिस्सेदारी के बारे में व्याख्यान दिया। उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मखाना हार्वेस्टिंग हेतु विकसित मशीन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने धमतरी जिले के पुरी गांव के प्रगतिशील कृषक श्री दुलेश्वर साहू की सफलता की कहानी को छात्रों एवं अन्य प्रतिभागियों के समक्ष साझा किया। उन्होंने बताया कि श्री साहू मखाने की खेती करके कैसे वे अधिक आय अर्जित कर रहें हैं। उन्होंने मखाने के आयातक देश और सरकार द्वारा किसानों को प्रदान की जाने वाली सब्सिडी के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी। डाॅ. अश्विनी सोनारी ने कृषि छात्रों को विदेशों में अध्ययन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने विदेशों के कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश हेतु आयोजित होने वाले ई.आई.एल.टी.एस., जी.आर.ई. एवं आई.बी.पी. जैसी परीक्षाओं के बारे मंे छात्रों को विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को बतया कि वे किस तरह संयुक्त राज्य अमेरिका कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, आस्ट्रेलिया एवं न्यूजिलैंड में उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और नौकरियां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने अध्ययन हेतु बैंकों से वित्तीय सहायता के लिए मापदण्ड के बारे में भी छात्रों को बताया। खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. एम.पी. त्रिपाठी ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में करियार विकास के अवसरों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।
कृषि छात्रों के लिए विदेशों में रोजगार के हैं असीमित अवसर: डाॅ. सेंगर
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