संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्चतर शिक्षा की संभावनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

जॉर्जिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने विद्यार्थियों को बताए अमेरिका में अध्ययन के गुर

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कैरियर डेव्हलपमेन्ट सेन्टर द्वारा आज यहां राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (नाहेप) के सहयोग से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए ‘‘संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्चतर शिक्षा की संभावनाएं एवं आवश्यकताएं’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया। डॉ. चंदेल ने इस अवसर पर कहा कि कृषि छात्रों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों में भी उच्च शिक्षा के असीमित अवसर उपलब्ध हैं। इन देशों में कृषि से संबंधित पाठ्यक्रमों में स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट तथा पोस्ट डॉक्टरेट कोर्सेज में अध्ययन के अवसर मिलने में अधिक कठिनाई नहीं होती। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी संख्या में छात्रवृत्तियां भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी सकारात्मक सोच एवं स्पष्ट रणनीति के साथ इन संस्थाओं में प्रवेश हेतु प्रयास करता है तो उन्हें सफलता मिलना निश्चित है। डॉ. चंदेल ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अपने विद्यार्थियों को विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन के अवसर उपलब्ध कराने हेतु उन विश्वविद्यालयों के साथ अनुबंध किये जा रहे हैं। जल्द ही जॉर्जिया विश्वविद्यालय के साथ भी एम.ओ.यू. किया जाएगा। कार्यशाला की अध्यक्षता प्लान्ट मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.बी. वेरूलकर ने की।
हाईब्रीड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में जॉर्जिया विश्वविद्यालय अमेरिका के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुदीप बाग ने संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालय में कृषि से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रमों के अध्ययन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि उन्हें किस देश में, किस विश्वविद्यालय में और किस पाठ्यक्रम में उच्च शिक्षा हेतु प्रवेश प्राप्त करना है और इसी के अनुसार आवश्यक तैयारियां करना चाहिए। संबंधित संस्थान की वेबसाइट पर जाकर वहां की प्रवेश प्रक्रिया, अहर्ताएं, पाठ्यक्रम, फीस स्ट्रक्चर, स्कॉलरशिप/फैलोशिप तथा फैकल्टी के बारे में जानकारी प्राप्त कर उसी के अनुरूप तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशों में अध्ययन हेतु जी.आर.ई., टी.ओ.ई.एफ.एल., आई.ई.एल.टी.एस. जैसी परीक्षाएं उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि जिस फैकल्टी के मार्गदर्शन में आप अध्ययन करना चाहते हैं उन्हें ईमेल के माध्यम से अपना बायोडाटा, अनुभव तथा प्रकाशनों की सूची भेजकर उनसे वर्चुअल मीटिंग का अनुरोध करना चाहिए तथा प्रवेश हेतु प्रयास करना चाहिए। शुभारंभ समारोह में कैरियर डेव्हलपमेन्ट सेन्टर के अध्यक्ष डॉ. जी.के. श्रीवास्तव, संचालक अनुसंधान डॉ. पी.एल. चंन्द्राकर, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय रायपुर डॉ. एम.पी. ठाकुर, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी रायपुर डॉ. विनय पाण्डेय, अधिष्ठाता खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर डॉ. एम.पी. त्रिपाठी एवं डेव्हलपमेन्ट सेन्टर के संयोजक डॉ. एस.एस. टुटेजा एवं डॉ. शुभा बैनर्जी भी उपस्थित थे।

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