मन को शांति एवं तनाव को दूर करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है. गायत्री मंत्र ही चारों वेदों का मुख्य सार तत्व माना जाता है. गायत्री मंत्र से ही इनकी उत्पत्ति हुई है, इसलिए गायत्री माता को वेद माता कहते हैं. त्रिदेव जिनकी उपासना करते हैं, जिनका ध्यान करते हैं, वह गायत्री माता देव माता हैं. वैशाख के बाद ज्येष्ठ माह में ही गायत्री जयंती है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी? तिथि को गायत्री माता प्रकट हुई थीं. गायत्री माता की पूजा करना और मंत्र का जाप करना बहुत ही लाभदायक होता है. पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं गायत्री मंत्र के अर्थ और उससे होने वाले लाभ के बारे में.
गायत्री मंत्र
ओम भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्.
गायत्री मंत्र का अर्थ
उस, प्राणस्वरूप, दुखनाशक, सुख स्वरुप, तेजस्वी, श्रेष्ठ, पापनाशक, दिव्य परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें. जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें.
गायत्री मंत्र जाप कब करें

  1. सूर्योदय से पूर्व
  2. दोपहर में
  3. सूर्यास्त से पूर्व
    गायत्री मंत्र जाप के फायदे
  4. गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने से मन शांत और एकाग्र रहेगा.
  5. इस मंत्र के जाप से दुख, कष्ट, दारिद्रय, पाप आदि दूर होते हैं.
  6. संतान प्राप्ति के लिए भी गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है.
  7. कार्यों में सफलता, करियर में उन्नति आदि के लिए भी गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए.
  8. विरोधियों या शत्रुओं में अपना वर्चस्व स्थापित करने के? लिए घी एवं नारियल के बुरे का हवन करें. उस दौरान गायत्री मंत्र का जाप करते हैं.
  9. जिन विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति कमजोर होती है, उनको गायत्री मंत्र का नियमित जाप एक माला करनी चाहिए.
  10. पितृदोष, कालसर्प दोष, राहु-केतु तथा शनि दोष की शांति के लिए शिव गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए.
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