आदिकाल से वन क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति आदिवासी कहलाता है यादव समाज और आदिवासी समाज एक दूसरे के पूरक हैं – धनमती यादव
देवभोग। चंदन जात्रा एवं बूढ़ा महादेव पूजन कार्यक्रम सामाजिक समरसता एवं सामाजिक एकता का परिचायक है क्योंकि वन भूमि में रहने वाला हर व्यक्ति इस संस्कृति को मानता है। उक्त बातें देवभोग क्षेत्र आदिवासी समाज द्वारा ग्राम चिचिया आयोजित चंदन जात्रा एवं बूढ़ा महादेव महा पूजन में मुख्य अतिथि की आसंदी से क्षेत्रीय विधायक डमरुधर पुजारी ने कही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सबसे सीधा समाज है हमारे समाज में राजा महाराजा सभी हुए आज भी हैं लेकिन हम अपने धर्म के प्रति कट्टर हैं, हम सब वन भूमि में रहने वाले संपूर्ण समाज को समाहित कर एकता व सामाजिक समरसता का प्रयास करें। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला पंचायत गरियाबंद के सभापति एवं छत्तीसगढिय़ा सर्व समाज महिला प्रकोष्ठ के महासचिव श्रीमती धनमती यादव ने कहा कि आज बड़ा सौभाग्य का विषय है की आदिकाल से वनांचल क्षेत्र में निवासरत मेरे भाई-बंधुओं आज जिस बात को मैं कहने जा रही हूं वह बहुत ही महत्वपूर्ण एवं विचारणीय विषयक है हम दोनों समाज का धर्म संस्कृति सभ्यता साहित्य लगभग मिलती-जुलती है आप बुढ़ादेव की पूजा करते हैं। यादव समाज के लोग नंदी महाराज का पूजा करते बुढ़ा देव मतलब शंकर जी एवं नंदी अर्थात शिव परिवार का अंग यादव समाज और आदिवासी समाज दोनों एक दूसरे के पूरक है और आदिकाल से वनांचल क्षेत्र में निवास कर रहे हैं इसलिए हम लोग भी आदिवासी में ही आते हैं। आदिकाल से वनांचल क्षेत्र में निवासरत समाज को आदिवासी कहा गया है आदिवासी कोई जाति नहीं है आदिवासी मतलब आदिकाल से निवासरत उसमें सभी प्रकार के जातियां समाहित है जिसमें खासकर यादव और और गोंड समाज का इतिहास मिलता है हम दोनों समाज की संस्कृति भी एक दूसरे से मिलती है, जिस दिन हम दोनों समाज एक हो जाएंगे दुनिया की कोई ताकत हमें अलग नहीं कर सकता। हमारे यादव समाज में एक वर्ग आता है गोंड गहिरा याने हम दोनों जाति में बड़ा सामंजस्य है इसलिए मैं आशा करती हूं कि आने वाले भविष्य में हम सब एक होकर अपने राजनीतिक भविष्य को सुधारें और राजतंत्र पर कब्जा करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि आज अगर हमें सबसे ज्यादा कोई नुकसान पहुंचा रहा है तो वह है नशाखोरी इससे हमें निजात पाना होगा और इसके लिए महिलाओं को आगे आकर संघर्ष करना पड़ेगा तब जाकर हम पुरुष भाइयों को इससे बचा सकते हैं, और हमारा परिवार हमारा समाज और हमारी संस्कृति और सभ्यता प्रदेश और देश की रक्षा कर सकते हैं। इस अवसर पर प्रोफेसर ओ.टी. ने समाज के लोगों से कहा कि जय सेवा का मतलब है हम दूसरों की सेवा करें लेकिन अब हम अपनी पुरानी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और नई संस्कृति में आने के कारण अब हमारा बुढा देव भी हमें साथ नहीं दे रहा है, उन्होंने कहा पूजा करने की विधि हमारी बदल गई एक समय था जब महिलाएं रज्जो के समय रसोई में नहीं जाती ना मंदिर देवाला जाती थी, लेकिन आज सब कुछ हो रहा है, नशा करके हम पूजा पाठ कर रहे हैं, ऐसे ही स्थिति में हमारा देवता भी हमें अब साथ नहीं दे रहा है, उन्होंने सामाजिक धार्मिक संस्कृति के संबंध में विस्तार से बात रखी। इस अवसर पर प्रमुख रूप से गांव के सरपंच राजकुमार प्रधान गांव के पटेल दूजे राम यादव, लंबोदर ध्रुव, टेकराम ध्रुव, वासुदेव नेताम ग्राम पुजारी, सुशीला पाथर जनपद सदस्य, दुष्यंत धुर्वा, धन सिंह मरकाम, टीकम सिंह मरकाम, महेश्वर, केनूराम यादव अध्यक्ष सर्व यादव समाज जिला गरियाबंद, जगमोहन मरही नित्यानंद ओटी, जगन्नाथ पोर्टी दुर्योधन मनहीरा, मकरन मरकाम, दामोदर मरकाम अध्यक्ष गोड़ समाज देवभोग ने संबोधित किया। इसके पूर्व आयोजकों ने सभी अतिथियों का गाजा- बाजा फूल माला के साथ स्वागत किया अभिनंदन किया। कथा बूढ़ा महादेव के पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया संपूर्ण कार्यक्रम में सामाजिक समरसता स्पष्ट रूप से दिख रही थी, वक्ताओं ने सामाजिक एकता पर बल देते हुए अपनी बात रखी। आभार प्रदर्शन अध्यक्ष दामोदर मरकाम ने किया।

