राजधानी रायपुर के समीप प्राकृतिक वन संपदा से परिपूर्ण वनक्षेत्र मोहरेंगा को इको टूरिज्म केन्द्र की दृष्टि से  ’इंदिरा प्रियदर्शनी नेचर सफारी’ मोहरेंगा के रूप में विकसित किया जा रहा है। रायपुर के जयस्तंभ चौक से 45 किमी की दूरी पर तिल्दा – खरोरा मार्ग में स्थित खौलीडबरी आरक्षित वनखण्ड में करीब 528 हेक्टेयर क्षेत्र में विविध प्रजाति के वृक्षों से आच्छादित तथा वन्यप्राणियों के रहवास के इस परिसर में प्रवेश करने पर यह एक शांत, शीतल और सुरम्य अभ्यारण्य जैसा अनुभव कराता है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 19 नवंबर 2020 को ’इंदिरा नेचर सफारी’ मोहरेंगा का लोकार्पण किया था। मोहरेंगा वन क्षेत्र में पूर्व में लगभग 100 से 150 चीतलों को विचरण करते हुये देखा गया था, वर्तमान में चीतलों की संख्या करीब 400 से 500 हो गई है। नेचर सफारी के खुले वाहन या स्वयं के चार पहियां वाहन में गाइड की सहायता से यहां के खुले वातावरण में चीतलों के समूहों और अन्य जानवारों को स्वछंद के रूप से विचरते हुए देखा जा सकता है।  

चीतलों के साथ ही साथ मोहरेंगा वन परिसर में जंगली सुअर, लकड़बग्घा, खरगोश, लोमड़ी, नेवला, नाग, अजगर, बंदर, लंगूर जैसे वन्यप्राणी भी विचरण करते हैं। यहां 70 से अधिक प्रजाति के स्थानीय व माइग्रेटरी चिड़ियों की प्रजातियाँ भी पायी जाती है। वनक्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष जैसे साजा, खैर, तेन्दू, सागौन, बीजा, महुॅआ चार, कुसुम, बहेड़ा, धावड़ा, आंवला, बांस सहित मूल्यवान एवं औषधि पूरक प्रजातियों के प्राकृतिक वन संपदा विद्यमान है। अपने कारवां से बिछड़े एवं गढ्ढे में फंसे एक ऊट को हाल ही में बचाकर वन विभाग के कर्मियों ने नेचर सफारी में छोड़ा था। अब यह नेचर सफारी अब उस ऊट के लिए उसका नया आश्रय बन गया है।

वन प्राणियों और यहां के नैसर्गिक सौंदर्य को देखने के लिए नेचर सफारी के माध्यम से चार मंजिला वॉच टावर बनाया गया है। पर्यटक यहां से नेचर सफारी का विहंगम दृश्य देख सकते है। यहां पर्यटकों के बैठने के लिए पेगोडा भी बनाया गया है साथ ही उनके जलपान के लिए रेस्टोरेंट की व्यवस्था भी की गई है। नन्हें बच्चों के लिए यहां झलो और फिसल पट्टी की भी व्यवस्था की गई है। यह जंगल सफारी सोमवार को छोड़कर शेष दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।

  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की जल-जंगल-जमीन के संरक्षण के लिये बनाये गये महत्वपूर्ण योजना ’नरवा- गरूवा – घुरूवा और बाड़ी’ में से नरवा विकास योजना के अंतर्गत यहां प्रवाहित प्राकृतिक नालों में भू-जल संरक्षण के अनेक कार्य कराए जा रहे है। इसमें गली प्लग, गैबियन चेकडेम, अर्दन डेम, स्टोन बाईडिंग, लूज बोल्डर चेकडेम जैसे कार्यों शामिल है। इससे एक और तो पशु-पक्षियों को गर्मी के दिनों में भी आसानी से जल उपलब्ध होगा, वहीं पारिस्थितकीय संतुलन को बनाए रखने में भी आसानी होगी।

अल्प समय में मोहरेंगा नेचर सफारी पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र बनने के साथ वनों के संरक्षण व वन्यप्राणियों के रहवास प्रबंधन की परिकल्पनाओं को साकार रूप देने में सफल हो रहा है।

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