दुनियाभर में कई रहस्य मौजूद है जो समय-समय पर सामने आते रहते हैं जिसे देखकर लोग हैरान भी रह जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्य से रूबरू कराने जा रहे हैं जो एक गांव से जुड़ा हुआ है.

दरअसल, ये गांव कई दशक पहले एक तालाब में समा गया था. उसके बाद ये गांव एक बार फिर से नजर आने लगा तो लोग हैरान रह गए. पानी की समस्या के समाधान के लिए हर देश की तरह ही ब्रिटेन की सरकार ने भी कई दशक पहले एक गांव को खत्म कर तालाब बनाया था. जिससे कई बड़े शहरों में पानी की सप्लाई की जा सके.

तालाब सूखा तो नजर आने लगा गांव

ब्रिटेन में जब गर्मी पड़ी तो तालाब का पानी सूख गया और गायब हो चुका ये गांव एक बार फिर से नजर आने लगा. उसके बाद गांव को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई. बता दें कि ये घटना ब्रिटेन के डर्बीशायर की है. जहां पर ये तालाब मौजूद है. बताया जाता है कि साल 1940 के दशक में डर्बीशायर के डेरवेंट गांव को खत्मकर तालाब का निर्माण कराया गया था. इस तालाब से ब्रिटेन के डर्बी, शेफील्ड, नॉटिंघम और लीसेस्टर शहरों को पानी की सप्लाई की जाती है.

साल 2018 में नीचे चला गया जलस्तर

साल 2018 में भीषण गर्मी पड़ने के बाद तालाब का जलस्तर बहुत नीचे चला गया, जिसकी वजह से गांव के कुछ इलाके नजर आने लगे. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचने लगे. बता दें कि इस साल भी ब्रिटेन में भीषण गर्मी पड़ रही है जिससे लोग बेहाल हैं. हीटवेव अब तक के सभी रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अगर ऐसी ही भीषण गर्मी पड़ती रही, तो लेडीबोवर जलाशय सूख जाएगा और पानी से गांव बाहर आ जाएगा.

1757 में गांव में किया गया था चर्च का निर्माण

एक रिपोर्ट के मुताबिक, गांव में सुंदर कॉटेजेज की एक कॉलोनी थी. इसी कालोनी में पथरीले पुलों के नीचे से डेरवेंट नदी बहा करती थी. इस कॉलोनी में एक संगठित समुदाय के लोग रहते थे और यहां पर कुछ घर और एक स्कूल था. इस गांव में एक चर्च था जिसका निर्माण साल 1757 में किया गया था. लेकिन शुरुआत में चर्च को नहीं तोड़ा गया था.

200 साल पहले गांव में रहते थे 100 लोग

तालाब में पानी भर जाने के बाद भी इमारत का ऊपरी हिस्सा दिखता था, लेकिन सेफ्टी का हवाला देखकर चर्च को तोड़ दिया गया. ऐसे मामले आ रहे थे कि लोग तैरकर चर्च के शिखर तक पहुंचने का प्रयास करते थे. एशोप्टन गांव में लोग मस्ती करते हुए नजर आते थे.

नदी में भेड़ों को नहलाते और पारंपरिक वेशभूषा में लोग दिखाई देते थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गांव में साल 1829 में 100 लोग रहा करते थे. गांव में जुलाई के महीने में ऊनी मेला का आयोजन किया जाता था. लेडीबोवर जलाशय के निर्माण के चलते पूरे गांव को खाली करा दिया गया और इमारतों को नष्ट कर दिया गया था.

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