रायपुर। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा महिला की राष्ट्रीय सचिव हनी वर्मा ने छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार हरेली पर्व की प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने बधाई संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और छत्तीसगढ़ में त्यौहार की शुरुआत हरेली से होती है। हरियाली अमावस्या को मनाया जाने वाला हरेली त्यौहार के दिन किसान नांगर (हल) एवं कृषि औजार की पूजा करते है, जो हमारे कृषि प्रधान संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो हरेली पर्व का महत्व धरती को हरा-भरा बनाये रखने के लिए पेड़-पौधे की महत्ता को भी प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सचिव हनी वर्मा ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ का सबसे पहला त्यौहार है, जो लोगों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था से परिचित कराता है। हरेली त्यौहार एक कृषि त्यौहार है। हरेली का मतलब हरियाली होता है, जो हर वर्ष सावन महीने के अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली मुख्यत: खेती-किसानी से जड़ा पर्व है। छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण किसानों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार के पहले तक किसान अपनी फसलों की बोआई या रोपाई कर लेते हैं और इस दिन कृषि संबंधी सभी यंत्रों जैसे-हल, गैंती, कुदाली, फावड़ा समेत कृषि के काम आने वाले सभी तरह के औजारों की साफ-सफाई कर उन्हें एक स्थान पर रखकर उसकी पूजा-अर्चना करते हैं। घर में महिलाएं तरह-तरह के छत्तीसगढ़ी व्यंजन खासकर गुड़ का चीला बनाती हैं। हरेली में जहाँ किसान कृषि उपकरणों की पूजा कर पकवानों का आनंद लेते हैं, आपस में नारियल फेंक प्रतियोगिता करते हैं, वहीं युवा और बच्चे गेड़ी चढऩे का आनंद लेते हैं। इस लोकप्रिय त्यौहार का नाम हरेली, हिंदी के शब्द हरियाली से आया है श्रावण माह में भारत में मॉनसून रहता है जिसके कारण बारिश होने से चारों तरफ हरियाली होती है इस समय किसान अपनी अच्छी फसल की कामना करते हुए कुल देवता एवं ग्राम देवता की पूजा करते हैं। हरेली त्यौहार के दौरान लोग अपने-अपने खेतों में भेलवा के पेड़ की डाली लगाते हैं इसी के साथ घरों के प्रवेश द्वार पर नीम के पेड़ की शाखाएं भी लगाई जाती हैं। नीम में औषधीय गुण होते हैं जो बीमारियों के साथ-साथ कीड़ों से भी बचाते हैं। लोहार जाति के लोग इस दिन घरों को अनिष्ट शक्तियों से बचाने के लिए घर के हर दरवाजे पर पाती ठोंकते ह,ैं जो लोहे का एक नोकीला कील होता है। हरेली तिहार के बाद अनेक त्यौहारों का सिलसिला शुरू हो जाता हैं।

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