देश भर में 31 अगस्त 2022 को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा. भगवान गणेश जी को सर्वप्रथम पूजनीय देवता का स्थान दिया गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था. भगवान गणेश जी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. उनकी एक कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है. पंडित इंद्रमणि घनस्याल के अनुसार, देवभूमि उत्तराखंड की व्यास गुफा में महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की कथा सुनाई थी और गणेश जी ने अपने एक दांत से यह कथा लिखी थी. भगवान गणेश जी ने महाभारत की कथा उत्तराखंड के मांणा गांव की व्यास गुफा में लिखी थी. यह गांव प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है. जहां व्यास पोथी नाम की जगह पर दो गुफा मौजूद हैं. एक गुफा व्यास गुफा तो दूसरी गणेश गुफा के नाम से जानी जाती है. इस गुफा में व्यास जी ने कई पुराणों की रचना की थी. व्यास गुफा में महर्षि वेद व्यास का मंदिर बना हुआ है, जबकि गणेश गुफा में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित है. आज भी यहां दूर दराज से भक्त भगवान गणेश और महर्षि देव व्यास के दर्शन करने आते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की कथा लिखने के लिए भगवान श्रीगणेश जी को याद किया. उन्होंने गणेश जी से महाभारत लिखने का अनुरोध किया, जिस पर गणेश ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया. कहा जाता है कि गणेश जी ने महर्षि वेद व्यास के समक्ष एक शर्त रख दी. गणेश जी ने महर्षि वेद व्यास से कहा कि आपको महाभारत कथा बिना रुके लगातार सुनानी होगी. इस पर महर्षि वेद व्यास ने भी गणेश से शर्त रखी कि बिना वाक्य को समझे उसे नहीं लिखेंगे. इसके बाद महाभारत लिखना शुरू हुआ. जब गणेश जी वाक्य को समझते तब तक महर्षि को सोचने के लिए समय मिल जाता. इस तरह महर्षि वेद व्यास और भगवान श्री गणेश ने महाभारत की रचना की थी.

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