राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में हुई बारिश ने मौसम का रुख बदल दिया है. लेकिन बिन मौसम हुई बारिश और ओलावृष्टी ने किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया है. अब भी बरसात और आंधी का सिलसिला जारी है और इसकी वजह से खेतों में खड़ी रबी की फसलें गिर गई हैं. जानकारी के अनुसार पिछले 24 घंटे में जोधपुर, करौली, नागौर, पाली और टॉक में जोरदार बारिश हुई है और आंधी का दौर भी जारी है और कई इलाकों में ओले भी गिरे हैं. मौसम विभाग ने अगले 4-5 दिन के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है. राजस्थान में तेज बारिश और ओले पडऩे से किसानों की फसलें खराब हो गईं है. इसे लेकर किसान काफी चिंतित हैं और सरकार से उम्मीद लगाए हुए हैं. इस संबंध में जनवरी से अब तक पाला, शीतलहर, बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसलों को जितना नुकसान हुआ है उसे लेकर आपदा राहत मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने सोमवार को विधानसभा में सरकार का पक्ष रखा. इस दौरान उन्होंने इस बार 103 लाख हेक्टेयर की तुलना में 109.55 लाख हेक्टेयर में बुवाई होने की जानकारी दी.
10 जिलों में 33 प्रतिशत फसलों को नुकसान
उन्होंने बताया कि पहले जनवरी माह में शीतलहर के कारण राज्य के 10 जिलों में 33 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा. इसमें भरतपुर, गंगानगर, नागौर सहित 10 जिलों के 5038 गांवों में 20.85 लाख किसानों पर असर पड़ा है. वहीं ओलावृष्टि से कोटा और उदयपुर के 18 हजार से ज्यादा किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है. हालांकि 19 जिले ऐसे हैं जहां किसी तरह की कोई फसल खराब नहीं हुई है. इस सिलसिले में सरकार ने 5 और 6 मार्च को ओलावृष्टि की गिरदावरी करवाई थी.
बीजेपी विधायकों ने सदन से किया वॉक आउट
मेघवाल ने कहा कि केवल कोटा में 69 गांवों के 8293 किसानों की फसलें खराब हुई हैं और उनको नुकसान झेलना पड़ा है. वहीं इस दौरान स्पीकर सीपी जोशी ने पूछा कि मंत्री ये बताएं कि क्या किसानों को कोई विशेष पैकेज या सहायता दी जा सकती है? इस पर मंत्रियों ने सीएम से वार्ता और कैबिनेट की बैठक करने का सुझाव दिया है. इसपर बीजेपी विधायकों ने असंतोष जताते हुए नारेबाजी की और सदन से वॉक आउट कर दिया. गौरतलब है कि विधानसभा में विधायकों ने इसबगोल, जीरे, अरंडी, गेहूं और चने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है.
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