बाहर के आवारा सांडों को साईं नगर जोरा जैसी कॉलोनी में सुबह से ही दिनभर और शाम तक मंडराते देखा जा रहा है. जोरा क्षेत्र के पशुपालकों की प्रतिक्रिया यह है कि अधिकतर इस प्रकार के बड़े-बड़े सांड जोरा गांव के नहीं है, वक्त बेवक्त इन सांडो को हो ना हो किसी अच्छी गौशालाओं या गौठानों में नहीं छोड़कर जिम्मेदार लोग जोरा जैसे और भी आस-पास के गांव में इन सांडो को छोड़कर चले जाते हैं . पशुपालकों का यहां तक भी कहना है कि जो सांड जोरा में दिखाई देते थे वह भटकते भटकते आसपास के गांवों जैसे लाभांडी धरमपुरा और सेरीखेरी तक देखे जाते हैं. भूखे प्यासे दर-दर भटकते हुए इन सांडों की सुधि लेने वाले कहीं कोई नजर नहीं आते हैं. इसका दूसरा दुखद परिणाम यह भी देखने में आता है कि कई बार राष्ट्रीय राजमार्गों में भीषण सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी इसी प्रकार के आवारा पशु बन जाते हैं जिसमें अप्रत्याशित जनहानि भी सामने आती है. श्री साईं दर्शन आवासीय समिति, साईं नगर जोरा के अध्यक्ष डॉ देवेंद्र कुमार सूर्यवंशी के हवाले से शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा जा रहा है कि कॉलोनी क्षेत्र के विशेषकर मासूम बच्चों, महिलाओं और वृद्धजनों की सुरक्षा की दृष्टि से इस प्रकार के आवारा बाहरी सांडो को किसी सुरक्षित दायरों में उचित देखभाल में रखा जावे ताकि भयमुक्त वातावरण में प्रोफेसर कॉलोनी और साईं नगर जोरा के सभी रहवासी सुबह शाम सुरक्षित रह सके.

