गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन बहुत ही अशुभ माना जाता है. आज गणेश चतुर्थी का दिन है. आज के दिन भगवान गणेश जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. आज के दिन भगवान गणेश की मूर्ति को घर पर लाते हैं और स्थापित करते हैं. गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को घर पर लाने की परंपरा है. गणेश जी को सुख, समृद्धि और बुद्धि का दाता माना जाता है. लेकिन आज के दिन एक बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
पौराणिक कथा
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए. इसको लेकर एक पौराणिक कथा है. कथा के अनुसार एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश जी के स्वरूप को लेकर उपहास कर दिया. इससे भगवान गणेश बहुत नाराज हो गए और चंद्रमा को श्राप दे दिया कि आज के बाद कोई भी तुम्हें देख नहीं पाएगा और प्रकाश क्षीण हो जाएगा. चंद्रमा को जब अपनी गलती का अहसास हुआ तो चंद्रमा ने गणेश जी से क्षमा मांगी. चंद्रमा के साथ अन्य देवताओं ने भी गणेश जी से चंद्रमा को माफ करने की विनती की. गणेश जी ने चंद्रमा को माफ तो कर दिया लेकिन श्राप से मुक्त करने में असमर्थता जताई. तब गणेश जी ने कहा कि श्राप के प्रभाव को तो कम नहीं कर सकता हूं लेकिन महीने में एक बार ऐसा होगा जब चंद्रमा की सारी रोशनी चली जाएगी और फिर धीर-धीरे प्रतिदिन आकार बड़ा होता जाएगा और माह में एक बार आप पूर्ण रूप में दिखाई देगा. जिसे पूर्णिमा कहा जाएगा. गणेश जी के श्राप के कारण ही चंद्रमा का आकार घटता और बढ़ता रहता है. गणेश जी ने ये भी कहा कि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष में पडऩे वाली चतुर्थी की तिथि को जो भी चंद्रमा के दर्शन करेगा उसे अशुभ फल मिलेगा. इसीलिए चंद्रमा का दर्शन करना गणेश चतुर्थी की तिथि को शुभ नहीं माना जाता है.
श्रीकृष्ण ने गलती से कर लिए थे चंद्रमा के दर्शन
पौराणिक कथा के अनुसार एक बाद श्रीकृष्ण ने गलती से चतुर्थी की तिथि पर चंद्रमा के दर्शन कर लिए. जिसके परिणाम स्वरूप श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लग गया. आरोप से मुक्त होने के लिए तब श्रीकृष्ण गणेश चतुर्थी का व्रत रखा और पूजा की तब वे अशुभता से मुक्त हुए.

चंद्र दर्शन के प्रभाव से बचने का मंत्र

सिंह: प्रसेनम् अवधीत्, सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तक:॥

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