रायपुर, कहाँ गए रायपुर-बिलासपुर फोरलेन के लिए 10 हजार से अधिक काटे गये पेड़ . यह सवाल आज छत्तीसगढ़ की विधानसभा में उठाया गया . कांग्रेस सदस्य अरूण वोरा ने कहा कि कटाई के बाद नए वृक्ष न लगने से प्रदूषण फैल रहा है। सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी इसको लेकर वनमंत्री महेश गागड़ा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के जरिए पेड़ काटे गए और डिपो में जमा करने के बजाए ले गए।
उनके सवाल के जवाब में वन मंत्री ने बताया कि रायपुर से बिलासपुर तक फोरलेन के निर्माण के लिए 10 हजार 283 वृक्षों की कटाई होना है, इनमें से 8851 तक वृक्ष काटे गए हैं। इसके एवज में 87770 वृक्षों का रोपण होना है। वन मंत्री ने बताया राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा राशि जमा नहीं करने के कारण वृक्षा रोपण नहीं हो पाया है।
भाजपा सदस्य देवजी पटेल ने आरोप लगाया है कि वन विभाग ने ठेकेदारों के माध्यम से पेड़ों की कटाई की है और ठेकेदार पेड़ काटकर ले गए। वन मंत्री ने इससे इंकार किया। उन्होंने कहा कि कटे पेड़ वन डिपो में जमा कराए गए हैं। भाजपा सदस्य शिव रतन शर्मा ने भी देवजी के आरोपों को दोहराते हुए पूछा कि पेड़ों को काटने के बाद किस डिपो में रखा गया है और कितनी मात्रा में लकड़ी जमा हुई है?
वन मंत्री ने कहा कि पेड़ काटने के बाद इलाके के नजदीकी डिपो में रखा गया है। मात्रा को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि बारिश में वृक्षारोपण कराया जाएगा। कांग्रेस सदस्य धनेंद्र साहू ने भी इस मामले को उठाया।
उन्होंने कहा कि रायपुर-बिलासपुर की तर्ज पर धमतरी मार्ग में भी लाखों पेड़ काट दिए गए हैं। उन्होंने पूरे इस मामले की जांच की मांग की। वनमंत्री इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
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