10 नवंबर को दीपोत्सव की शुरुआत 4 राजयोग में हो रही है। जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलेगा। इस उत्सव में हर दिन अलग-अलग देवताओं का पूजन होगा। पहला पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस को कुबेर पूजन से शुरू होगा और भाई दूज को मृत्यु के देवता यमराज के दीपदान तक चलेगा।ज्योतिषियों का कहना है कि धनतेरस 10 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन तेरस तिथि दोपहर करीब 12.35 पर शुरू होगी और अगली दोपहर 2 बजे तक रहेगी। रूप चतुर्दशी 11 को मनेगी। इस दिन चौदस तिथि दोपहर 2 बजे से शुरू होगी और अगली दोपहर 2.40 तक रहेगी।diwali 77 दीपावली के तीसरे दिन भाई दूज, लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर से मैच नहीं होती तिथियां12 नवंबर, रविवार को दीपावली मनेगी। दोपहर ढाई बजे बाद अमावस्या शुरू होगी जो सोमवार को दोपहर 3 बजे तक रहेगी। आधे दिन से ज्यादा समय तक अमावस होने के कारण 13 को गोवर्धन पूजा नहीं होगी बल्कि 14 को होगी। 15 को भाई दूज मनेगी।

भाईदूज

अंग्रेजी कैंलेंडर की तारीखों और तिथियों में तालमेल नहीं बैठ पाने की वजह से कोई भी त्योहार दो दिन तक रहता है। चंद्रमा जब पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए 12 डिग्री की दूरी तय करता है तो इसमें लगने वाले समय को तिथि कहते हैं। इस तरह आगे बढ़ते हुए एक चक्कर (360 डिग्री) पूरा करने में कुल 30 तिथियां बनती हैं। इनमें 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की होती हैं। पृथ्वी, सूर्य के चक्कर लगाती है, पृथ्वी का उपग्रह होने के कारण चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है
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