छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता तथा अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री ( प्रदेश प्रभारी झारखंड राज्य) बिरेंदर सिंह ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि मानवसंसाधन विकास समिति पूरे छत्तीसगढ़ में लॉयर श्री एस एन पटेल के अध्यक्षता में कार्य कर रही है तथा बतौर प्रवक्ता श्री सिंह ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर अनुपयोगी कानूनों को समाप्त किए जाने पर सरकार के इस कदम की सराहना की ,श्री सिंह ने आगे बताया कि कानून में संशोधन आवश्यक था परंतु ये भी ध्यान रखना होगा की FIR दर्ज होने के साथ ही पुलिस को बिना वारंट के भी कई मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार मिल जाता है जिससे कई बार निर्दोष व्यक्ति भय के कारण गलत कदम उठा लेता है अथवा अग्रिम जमानत हेतु सेशन कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने पर उच्च न्यायालय के शरण में जाता है,जहां कुछ दिन उसे बेल मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता है परंतु Fir दर्ज होते साथ ही यदि पुलिस गिरफ्तार कर लेती है तो ये उस निर्दोष व्यक्ति के सम्मान और जीवन पर गहरा आघात ही है,जिसे माननीय न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष भी प्रस्तुत नहीं कर पाता ,ऐसी स्तिथि में ये उसके मानव अधिकार का हनन ही है।श्री सिंह ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय तथा कानून मंत्रालय को सुझाव दिया है कि non Henious समझौता योग्य अपराध में FIR दर्ज होते साथ ही पुलिस नोटिस के माध्यम से आरोपी को अवगत कराए की व्यक्ति एक निश्चित अवधि में अपनी जमानत पुलिस तथा कोर्ट में प्रस्तुत करें साथ ही साथ ऐसे मामले में जितनी भी धाराएं जहां Henious क्राइम न हुआ हो तथा सरल भाषा में ऐसे मामले जो समझौता योग्य हों,ऐसे मामलों को सरल जमानतीय श्रेणी में रखा जाए,जिसके जमानत याचिका सेशन कोर्ट से ही स्वीकृत हो जानी चाहिए क्युकी गिरफ्तारी की अनिवार्यता ऐसे प्रकरणों ही होनी चाहिए जहां जीवन को खतरा,संगठित गिरोह बना कर अपराध,अथवा सामूहिक रेप तरह अन्य अत्यंत गंभीर मामले हों।श्री सिंह ने ये भी कहा की भविष्य में कोरोना जैसे न जाने कितनी परिस्तिथियां और आयेंगी ऐसे में किसी निर्दोष व्यक्ति की कारागार में कष्ट या यातना या मृत्यु न्याय संगत नहीं होगी,इसलिए इस प्वाइंट पर भी भी सरकार द्वारा विचार किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है,जो की शायद निश्चित रूप से सरकार के विचाराधीन में भी होगा,परंतु फिर भी चूक की कोई गुंजाइश नहीं रहे वर्ना ये चूक मानव अधिकार हनन का बड़ा कारण न बन जाए इसका अनुरोध भी श्री सिंह ने अपने पत्र में किया है तथा भ्रष्टाचार एवं व्यर्थ में कानून के डर से फरारी जैसी घटनाओं पर कमी आयेगी और पुलिस पर भी अपराधियों के खोजबीन में समय/ऊर्जा बर्बाद करने का प्रेसर नही रहेगा और निर्दोष को फेयर ट्रेल हेतु पर्याप्त समय मिले ये भी ध्यान रखना होगा।
कानून में बदलाव सराहनीय परंतु गैर जरूरी गिरफ्तारी मानवाधिकार का हनन, संशोधन जरूरी: बिरेंदर सिंह
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