अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी को भगवान की प्राण प्रतिष्ठा होने के साथ ही 500 वर्षों का इंतजार खत्म हो गया है। सोमवार को पूरे विधि-विधान से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई। दुनियाभर के करोड़ों भक्त इस पल का वर्षों से इंतजार कर रहे थे। अपने दिव्य-भव्य स्वरूप के साथ अब रामलला सभी के सामने हैं। रामलला को कई दिव्य आभूषणों और पौराणिक कथाओं में वर्णित उनके स्वरूप के आधार पर वस्त्रों से सुसज्जित किया गया है।
रामलला के आभूषणों का निर्माण अध्यात्म रामायण, श्रीमद् वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरितमानस तथा आलवन्दार स्तोत्र के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्रसम्मत शोभा के अनुरूप शोध और अध्ययन के बाद किया गया है। भगवान राम के आभूषण बनाने में 15 किलो सोना और करीब 18 हजार हीरे और पन्ना का इस्तेमाल किया गया है। तिलक, मुकुट, 4 हार, कमरबंद, दो जोड़ी पायल, विजय माला, दो अंगूठी समेत कुल 14 आभूषण तैयार कराए गए हैं। ये आभूषण सिर्फ 12 दिन में बनकर तैयार हुए हैं।

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