गुजरात की मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने 41 साल पुराने फर्जी मार्कशीट मामले में आरोपी डॉक्टर उत्पल पटेल को दोषी मानते हुए 3 साल की सजा सुनाई है. साल 1980 में उत्पल पटेल ने अहमदाबाद के सीएन स्कूल से 12वीं कक्षा (साइंस) की परीक्षा दी थी. रिजल्ट में उनको 48 प्रतिशत मार्क हासिल हुए थे जो मेडिकल कॉलेज में जाने के लिए पर्याप्त नहीं थे. जिस वजह से उत्पल ने फर्जी मार्कशीट बनवाकर 68 प्रतिशत मार्क दिखाए ताकि उनको मेडिकल में दाखिला मिल पाए.
साल 1984 में उनके खिलाफ पुलिस फरियाद हुई. इसके बाद कोर्ट में केस चलता रहा और 41 साल बाद कोर्ट ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई है. उत्पल पटेल का फर्जी मार्कशीट का मामला जब पकड़ा गया तब उन्होंने गुजरात से बाहर जाकर दूसरे राज्य से मेडिकल में प्रवेश लिया और डॉक्टर भी बने. तब से लेकर आज तक वह पेशे से डॉक्टरी कर रहे थे.
इस केस में सरकारी वकील प्रज्ञा प्रजापति का कहना है कि कोर्ट ने सारे आरोप सही माने हैं और फर्जी मार्कशीट से गलत तरीके से मेडिकल में दाखिला लेने हुए की बात भी साबित हुई. आरोपी के इस गंभीर गुनाह के लिए उनको किसी प्रकार की राहत न मिले ऐसी अपील की गई थी.
इन अलग-अलग धाराओं के लिए सजा सुनाई गई. कोर्ट ने यह भी माना कि मेडिकल पेशे के साथ जुड़ा हुआ व्यक्ति समाज में इस प्रकार का गुनाह करता है तो दूसरे लोगों पर इसका गलत असर होता है, इसलिए आरोपी को किसी प्रकार की राहत देना न्यायिक हित में नहीं है.
इस मामले में कोर्ट ने स्कूल से लेकर गुजरात शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों की गवाही के बाद पूरी तरह से पाया कि आरोपी डॉक्टर उत्पल पटेल ने फर्जी मार्कशीट पेश करके बीजे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया था.
क्या था पूरा मामला?
साल 1980 में उत्पल पटेल अहमदाबाद के एक स्कून में 12वीं क्लास में साइंस पढ़ रहे थे और उस साल दी हुई परीक्षा में उनको सिर्फ 48 प्रतिशत मार्क मिले थे जो मेडिकल में दाखिला लेने के लिए पर्याप्त नहीं थे, जिसके कारण उसने गुजरात माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की फर्जी मार्कशीट बनवाकर अपने माक्र्स 48 प्र. से बढ़कर 68 प्र. कर दिए थे.
एफआईआर के समय उम्र थी 17 और दोषी पाए गए 60 साल में
इसके बाद उसने अहमदाबाद की सबसे प्रतिष्ठित बीजे मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था और पढ़ाई भी शुरू कर दी थी. जब एडमिशन के बाद विद्यार्थियों के दाखिले की स्क्रूटनी हुई जिसमें पाया गया कि मार्कशीट गलत है तो इसके बाद उत्पल पटेल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई. जैसे ही पुलिस फरियाद हुई, उत्पल पटेल गुजरात से तमिलनाडु चले गए और वहां के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बन गए. गुजरात में एक ओर केस चलता रहा, वहीं दूसरी ओर उत्पल पटेल डॉक्टर बनकर काम भी करने लगे. जब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी तब वह 17 साल के थे और आज जब वह दोषी पाए गए तब 60 साल के हो चुके हैं.

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