राजनांदगांव। हज हाऊस छत्तीसगढ़ का नाम हुजूर अमीने शरियत के नाम रखने की मांग को लेकर शहर के जामिया कमेटी जामा-अ-मस्जिद पठानपारा, इंतेजामिया कमेटी हनफी मस्जिद गोल बाजार, हजरत बाबा सैय्यद अटलशाह रानी सागर एवं आलाहजरत वेलफेयर सोसायटी, नूरी मस्जिद गौरीनगर, शाहे मदीना मस्जिद शांति नगर एवं पार्रिनाला दरगाह के पदाधिकारियों ने जिलाधीश टोपेश्वर वर्मा को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित राजनांदगांव के प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर, अल्पसंख्यक मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, छग राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष मो. असलम एवं छग राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम रिजवी के नाम समाज के आफताब अहमद ने ज्ञापन सौंपा है। आफताब अहमद ने बताया कि रायपुर छग में हुकूमत की जानिब से हज हाऊस की तामिर की जा रही है, यह मुसलमानों के लिए बड़ी खुशी की बात है और इस खुशी में चार चांद लगाने के लिए हुकूमते छत्तीसगढ़ को चाहिए कि इस हज हाऊस का नाम छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सूफी धर्मगुरू हुजूर अमीन-ए-शरियत अल्लामा सिब्तैन रजा खां साहब पर रखा जाए और यह इस बुनियाद पर नहीं कि इस राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रा, झारखंड, महाराष्ट्र, उड़ीसा वगैरह में हजरत के गुलामों की तादाद लाखों में है, बल्कि इस बुनियाद पर कि हुजूर अमीन-ए-शरियत अल्लामा सिब्तैन रजा खां साहब ने अपनी पूरी जिंदगी कोमो मिल्लत की बेलौस खिदमत अंजाम दी है। कभी किसी का दिल ना दुखाया आप की चौखट पर हर धर्म, हर जाति, हर मजहब के मानने वालों का तांता लगा रहता था और आपने कभी किसी को अपने दर से फरामोश नहीं किया, यही वजह है कि आज इस सूबे में हजरत की और उनके खानदार वालों की कद्रो व इज्जत है। आफताब अहमद ने बताया कि हुजूर अमीन-ए-शरियत अल्लामा सिब्तैन रजा खां साहब के मानने वाले हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मौजूद है और अमीन ए शरियत के दादा आला हजरत (इमाम अहमद रजा खां) के नाम से आला हजरत ट्रेन, आला हजरत हज हाऊस गाजियाबाद उत्तर प्रदेश, आला हजरत अस्पताल बरेली, आला हजरत लायब्रेरी, आला हजरत चौक मुंबई और न जाने कितनी ऐसी बड़ी चीजें है, जिनका नाम आला हजरत के नाम से रखा गया है और अब यह सुनहरा मौका हुकूमतें छत्तीसगढ़ को मिला है।

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