Friday, August 29

बदले में पुरुषों को अच्छी खासी कीमत भी देती हैं

कारगिल। भारत वैसे तो कृषि प्रधान माना जाता है और यहां के गांव और मिट्टी की सुगंध लोगों को अपनी ओर खींचती है। यह एक अलग बात है गांव के लोगों को शहर भाता है लेकिन शहर के लोग भीड़ भाड़ से बचने और छुट्टी मनाने गांव या फार्महाउस में जाकर सुकुन पाते हैं। भारत के गांव बहुत ही खूबसूरत होते हैं। यहां की हरियाली और शुद्ध हवा का मजा लेने के लिए देश क्या विदेश से भी लोग यहां आते हैं। लेकिन एक गांव भारत में ऐसा भी है, जहां पर लोग उसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि बच्चे पैदा करवाने यहां आते हैं। जी हां, है सच है। ये गांव कारगिल से 70 किलोमीटर दूर स्थिति है और इसका नाम आर्यन वैली विलेज है। इस गांव में यूरोप से महिलाएं घूमने नहीं बल्कि यहां के मर्दों से खुद को प्रेग्नेंट करवाने आती है। यह सोचने पर आप मजबूर होंगे कि आखिरकार इस गांव में ऐसा क्या है कि विदेशी महिलाएं यहां पर आने को मजबूर हो जाती हैं? तो इसका जवाब है यहां रहने वाले ब्रोकपा जनजाति के लोग…जिनके बारे में कहा जाता है कि वो अलेक्जेंडर द ग्रेट की सेना के वशंज है। बताया जाता है कि अलेक्जेंडर द ग्रेट जब हराने के बाद भारत से जा रहा था तो उसकी सेना के कुछ लोग भारत के इसी गांव में बस गए थे। इसके बाद से आजतक उनके वंशज इसी गांव में रह रहे हैं। जब यूरोप की महिलाओं को अलेक्जेंडर द ग्रेट के सैनिकों जैसे ही बच्चे की चाहत लेकर इस गांव में आती है। यहां पर रहने वाले पुरुषों से वो शारीरिक संबंध बनाती है ताकि उनके बच्चे भी अलेक्जेंडर द ग्रेट के सैनिकों की तरह लंबे, नीली आंखों वाले और मजबूत शरीर वाले पैदा हों।

ये काम यहां रह रहे पुरुष ऐसे ही नहीं करते हैं। इसके बदले यूरोपियन महिलाएं उन्हें अच्छी खासी कीमत देती हैं और काम पूरा होने के बाद वो अपने देश वापस चली जाती हैं। ये काम यहां काफी लंबे समय से चल रहा है और अब तो ये एक व्यापार की तरह हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुदरत ने इन पुरुषों को सच में बेपनाह खूबसूरत बनाया है और यहां पर 2 हजार से भी ज्यादा आर्यन आज भी जिंदा है। इन लोगों की संस्कृति हम लोगों से बिल्कुल अलग है। ये लोग कलरपुल कपड़े पहनते हैं और ब्रेक्सकाड भाषा बोलते हैं। ये भारत में रहते हुए सालों हो गए और हिन्दी भी सीख गए है। बता दें आर्यन समाज वाले लोग आग की पूजा करते हैं। उनके यहां बलि देने की भी प्रथा है। वे गाय से ज्यादा बकरी को पवित्र मानते हैं।

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