छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता सह अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री( प्रभारी झारखंड राज्य )श्री बिरेंदर सिंह ने विक्रम संवत 2081 की हार्दिक बधाई एवं मंगल कामनाएं प्रेषित करते हुए कहा है कि सनातन परंपरा बहुत ही प्राचीन है तथा सनातन मंत्र वसुधैव कुटुंबकम अपने आप में विश्व मंगलकामना हेतु बोला जाने वाला एकमात्र ऐसा महा मंत्र है जो वैश्विक शांति और प्रगति की कामना करता है और पूरे विश्व को एक परिवार समझता है यह केवल एक मंत्र नहीं बल्कि सभी सनातनियों के लिए ईश्वर का आदेश है जिसका अनुसरण विश्व के प्रत्येक धर्म ,पंथ समुदाय ,मजहब को भी करना चाहिए तभी वैश्विक शांति एवं प्रगति देखने को मिलेगी तथा यह धरती फिर से स्वर्ग के समान हो जायेगी ।श्री सिंह ने ये भी कहा प्रभु के लिए अपने प्रेम के सुगंध से धरती को स्वर्ग समान बनाएंगे हम सब मिलकर क्युकी इस धरती पर ही पढ़ी जाती है ईश्वर महिमा की श्रीमद भगवद्गीता,कुरान ए पाक,पवित्र बाइबल,गुरु ग्रंथ साहिब श्री सिंह ने आगे कहा जो ईश्वर इस धरती पर बार बार किसी न किसी रूप को धर कर आए,किसी भी भाषा बोली को बोल कर आए,और सच यही है की धरती उनकी है हमारी नहीं,हमे नफरत की गंदगी नहीं फैलानी,प्रेम भाईचारे की सुगंध फैलानी है। वसुधैव कुटुंबकम् हमारी कमजोरी नहीं हमारी शक्ति है,जिसने सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आज पूरे विश्व को यह एहसास दिलाया की हम समय आने पर अपने धर्म,राष्ट्र की रक्षा करना भी जानते हैं और विश्व के जिस भी देश में हमारे राष्ट्र का भीमकाए अतिआधुनिक सरकारी विमान उतरता है, वहां के राष्ट्र अध्यक्ष हमारी संस्कृति को ससम्मान झुक कर हर्षित होकर स्वागत करते हैं,तथा हमारे राष्ट्र की कांग्रेस/बीजेपी सरकार ने पड़ोसी देशों तथा विश्व के कोने कोने को धर्म निरपेक्षता का परिचय देते हुए कई बार अन्न दान,वस्तरदान, कोरोना काल में स्वास्थ सामग्री आदि प्रदान किया और नाटो में हमारे देश के कई शन्ति दूत योद्धा दिए हैं ।जल,थल,वायु,अंतरिक्ष सभी पर हमारे राष्ट्र ने अपने प्रभाव और ज्ञान से विश्व को सदैव अचंभित किया है,ये हम सब के लिए गर्व की बात है।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
Exit mobile version