अयोध्या में शुक्रवार यानि (आज) को राम जन्मभूमि मंदिर में वैज्ञानिकों द्वारा रामलला के सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। रामनवमी पर सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक को लगातार 4 मिनट तक सुशोभित करेंगी। इस दौरान सूरज की किरणें पड़ते ही रामलला का मस्तक मणि जैसा दमक उठा। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी आ चुके हैं। राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने बताया कि वैज्ञानिकों की मौजूदगी में सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे वैज्ञानिकों की मौजूदगी में सूर्य तिलक किया गया। सूर्य तिलक के इस एक मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास आरती कर रहे हैं। इस बीच सूर्य की किरणें रामलला के माथे पर तिलक लगाती हैं।

वैज्ञानिकों का प्रयास बेहद सराहनीयः मंदिर के मुख्य पुजारी – मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने कहा कि सूर्य तिलक का दृश्य अद्भुत था। वैज्ञानिकों ने जिस तरह से प्रयास किया वह बेहद सराहनीय है। त्रेता युग में भी जब भगवान राम का जन्म हुआ था तब सूर्य देव 1 माह तक अयोध्या में रहे थे। त्रेता युग का वह दृश्य अब कलियुग में भी साकार हो रहा है।

परियोजना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान भी रहेगा शामिल – सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप चौहान ने बताया कि रामनवमी की तिथि चंद्र कैलेंडर से तय होती है। सूर्य तिलक समय पर हो, इसके लिए सिस्टम में 19 गियर लगाए गए हैं, जो दर्पण और लेंस पर पड़ने वाली किरणों की गति को सेकेंडों में बदल देंगे। बेंगलुरु स्थित कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और पीतल के पाइप का निर्माण किया है। इस परियोजना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान भी शामिल है।

अद्भुत होगा नजारा – रामलला के ललाट पर जब सूर्य की किरणें पड़ेंगी तो यह नजारा काफी अद्भुत होगा। केवल राम नवमी के दिन ही रामलला के प्राकट्य समय में ही सूर्य ललाट पर दिखाई देगा। इसे देखने के लिए भक्त काफी उत्सुक हैं।

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