छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता सह अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (प्रभारी झारखंड राज्य) बिरेंदर सिंह के श्री राम नवमी के पावन अवसर कर बधाई देते हुए कहा की आदिकाल से ही महामंत्र `सर्वे भवन्तु सुखिन ‘ तथा वसुधैव कुटुंबकम् एवं 33कोटि देवी देवता होने की बात हमारे संस्कारों में घोली गई है,जिसका प्रभाव ये हुआ की हम पूरे विश्व की भलाई और मंगल कामना करते हैं तथा निरंकार ईश्वर के 33 कोटि में प्रभु यीशु,कहें या अल्लाह सबको परमात्मा समझ कर हम मस्जिद,या चर्च के सामने से सर झुका कर जाते हैं,तथा निरंकार परमात्मा के साकार प्रभु राम को अपने इन्ही आदर्शों के कारण समाज के प्रत्येक तबके का साथ मिला,और शास्त्रों के अनुसार उस समय भी शैतानी शक्तियां मनचाहा रूप धारण करने में सक्षम थीं,उसी प्रकार आज भी ऐसे कई लोग हैं जो बाहर से कुछ और परंतु अपने कार्यों से नफरत,भ्रम आदि शैतानी कार्यों में लिप्त हैं,जिन्हे उनके आचरण से पहचानना बहुत जरूरी है,सम्मान,प्रेम का जवाब यदि पीठ पर छुरा घोपने से या नफरत से मिले तो ये किस प्रकार का पाखंड है,किताबी ज्ञान के भाव को नासमझी से कारण ही मनुष्य आज गलत राह पर चल रहा है,प्रलोभन या भ्रमित कर के या डरा कर किया गया धर्मपरिवर्तन निरर्थक है,श्री सिंह ने सभी से ईश्वर,अल्लाह, गॉड की भांति प्रेम ,सौहाद्र के मार्ग पर चलने,और नफरत,अराजकता,झूठी कट्टरता वाले शतैनी कार्यों से दूर रहने की अपील सभी से की है,तभी सही मायनो में विश्व कल्याण और मानव कल्याण संभव है।

