रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिरमौर ने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों को कोरोना वारियर्स घोषित करने एवं 50 लाख रुपए का बीमा करने की मांग शासन-प्रशासन से की है। इस संबंध में उन्होंने संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को एक पत्र भी प्रेषित किया है। प्रेषित पत्र में उन्होंने कहा कि विभाग में अधिकारी एवं कर्मचारी के द्वारा अपने-अपने संस्थाओं में मूल विभागीय कार्य पशु उपचार, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान एवं टीकाकरण जैसे कार्य पूरे निष्ठा से निरंतर किये जा रहे हैं। इसमें सभी अधिकारी कर्मचारियों को पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक जूनोटिक बीमारियों जैसे एन्थे्रक्स, टीबी, बु्रसेलोसिस, ग्लैण्डर्स आदि से संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है। कोरोना संक्रमण काल में यह खतरा दुगुना हो गया है, क्योंकि एक तो पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक जूनोटिक बीमारियों का खतरा तो दूसरी ओर विभागीय कार्य पशु उपचार, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं टैगिंग जैसे कार्य के संपादन के दौरान पशु पालकों एवं ग्रामीणों एवं अन्य व्यक्तियों से कोरोना संक्रमण का खतरा है। कोरोना संक्रमण काल में एवं उसके पूर्व में जिला अधिकारियों को अधिकारी कर्मचारी के लिए प्रोटेक्टिव किट (ग्लब्ज, हैंडवॉश, फेस मास्क, हेडकेप, एवं सैनेटाइजर) आदि की मांग की गई है, परंतु जिला अधिकारियों के द्वारा एकाध बार आधी-अधूरी मात्रा में सामग्री प्रदाय कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। जबकि इन सुरक्षात्मक सामग्रियों की निरंतर आवश्यकता है और न ही किसी भी संस्था में सैनिटाइजेशन करवाया गया है। कृपया अवगत होना चाहेंगे एक पशु के उपचार, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान एवं टीकाकरण जैसे कार्य के लिए कम से कम तीन-चार व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है, उपरोक्त कार्य के दौरान अधिकारी-कर्मचारी पशु पालकों के साथ बहुत ही नजदीकी संपर्क के साथ कार्य करते हैं। जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में जब कोरोना का संक्रमण बेकाबू होकर लगातार बढ़ रहा है तथा अधिकांश कोरोना पॉजिटिव व्यक्तियों के बिना लक्षण वाले (एसिम्टोमेटिक) होने के कारण विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को संक्रमण का खतरा अत्यधिक है। ऐसी परिस्थितियों में कोरोना से बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग का पालन व्यवहारिक रूप से अत्यधिक कठिन है। फिर भी विभाग के अधिकारी कर्मचारी द्वारा जान जोखिम में डालकर कोरोना काल में अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन किया जा रहा है। इसके उपरांत भी शासन एवं उच्च अधिकारियों से किसी भी प्रकार का सुरक्षा सरंक्षण एवं प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। अत: निवेदन है कि विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में प्रोटेक्टिव किट (ग्लब्ज, हैंडवॉश, फेस मास्क, हेडकेप, एवं सैनेटाइजर) आदि प्रदाय किया जाये। विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व एवं सफाई कर्मचारियों की तरह कोरोना वारियर्स घोषित किया जाये। मैदानी संस्था में पदस्थ एवं पशुओं के उपचार, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं टैगिंग जैसे कार्य में संलग्र विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों का केन्द्र शासन की तरह रुपए 50 लाख का बीमा विभाग की ओर से कराया जाये। अंत में श्री सिरमौर ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि संघ के उपरोक्त मांगां पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करेंगे।

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