रायपुर। जनजातीय समाज सदैव से प्रकृति पूजक रहा है। हमारी भारतीय संस्कृति में प्रकृति के पांच तत्व पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। प्राचीनकाल से जनजातीय समाज या अन्य समाज का इन तत्वों के प्रति आदर तथा संरक्षण की भावना रही है। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कही। वे आज आदिवासी अधिकार दिवस पर आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रही थी। उन्होंने आदिवासी समाज के युवाओं से आग्रह किया कि वे सामने आएं और शासन की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लें। मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल का मर्म समझते हुए स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर परिष्कृत रूप में प्रस्तुत करें। उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी और आत्मनिर्भर बनेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए हमारे संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति बहुल राज्यों में 5वीं और 6वीं अनुसूची का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद ने एक अधिनियम बनाया है, इसे पेसा अधिनियम 1996 के रूप में जाना जाता है। दूसरा वनाधिकार अधिनियम 2006 है, जो अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को वन अधिकारों की मान्यता देता है। तीसरा, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार है। आवश्यकता है कि हम अपने अधिकारों के बारे जाने और जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि हम भारत देश की बात करें तो अलग-अलग भौगोलिक परिक्षेत्र में जनजातीय समाज के लोग निवासरत हैं, उस क्षेत्र के अनुरूप विभिन्न भाषा, संस्कृति और परम्पराएं हैं, परन्तु इसके बावजूद हम सबमें एक साम्यता है, जो एक परिवार का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि हमारे जनजातीय समाज का संपर्क कृषक समाज से हुआ और कई परंपराओं और आर्थिक उपार्जन के तरीकों का आदान-प्रदान हुआ। आज जनजातीय समाज स्थायी और आधुनिक खेती कर रही है और खेती के नए-नए तरीके को अपना रही है। इसी प्रकार कृषक समाज जनजातीय समाज की संपदा-विद्या जैसे जड़ी बुटियों का ज्ञान तथा वनोपजों को भी अपनाया है और यहां तक की पूरा देश और दुनिया उन जड़ी बुटियों का कई बीमारियों से लडऩे में उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लोगों ने भारत देश के स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ी, अवसर पर हम वीरनारायण सिंह का स्मरण करेंगे, जिन्होंने सारे समाज के कल्याण के लिए अंग्रेजों से विद्रोह किया और शहीद हो गए। हम बिरसा मुण्डा की बात करें तो अंग्रेजों के खिलाफ एक आंदोलन छेड़ा। इसी तरह रानी दुर्गावती, तिल्का मांझी, सिद्धु, कानो, टंट्या भील जैसे कई महान लोगों ने अपना योगदान दिया। इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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