सावन माह में भोलेनाथ के भक्तों की अलग-अलग भक्ति भावना देखने को मिलती है। भक्तगण विभिन्न रूपों में अपनी आस्था को प्रकट करते हैं। कुछ ऐसा ही अनोखा वाकया बिलाईगढ़ में देखने को मिला है, जहां एक युवती अन्न-जल त्यागकर शिवजी की आराधना में लीन हो गई है। छपेरी गाँव की पढ़ी-लिखी हेमलता की कहानी आज सबको अजीब लगने लगी है। आखिर क्यों 12वीं तक पढ़ी-लिखी हेमलता अब तपस्वी बन रही है? इसका उत्तर सलिहा से लगे घनघोर जंगल के बीचों-बीच स्थित पवित्र स्थल मुनिचुवां में मिलता है। हेमलता वहां शिवजी की आराधना करते हुए भक्ति में डूबी है और तपस्या कर रही है।

परिजनों की चिंता और पहरेदारी
हेमलता के परिजन अपनी जान जोखिम में डालकर बीच जंगल में तंबू लगाकर उनकी पहरेदारी कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, हेमलता बचपन से ही भक्ति भावना में आस्था रखती थी और पूजा-पाठ किया करती थी। शायद यही वजह है कि वह आज शिवजी के प्रति आस्था रखकर तपस्या कर रही हैं।

श्रद्धालुओं का आगमन
हेमलता की तपस्या की खबर सुनकर आसपास के लोग भी उन्हें देखने पहुंच रहे हैं। जहां हेमलता पढ़ाई की उम्र में तपस्या में लीन हो गई हैं, वहां की यह घटना सभी के लिए कौतूहल का विषय बन गई है। धीरे-धीरे लोग उसे देखने और उसकी तपस्या को समझने के लिए पहुंच रहे हैं।

यह घटना न केवल हेमलता के परिवार के लिए बल्कि पूरे गाँव के लिए एक अनोखी और प्रेरणादायक घटना बन गई है। हेमलता की भक्ति और तपस्या की कहानी ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भक्ति और आस्था की शक्ति कितनी महान हो सकती है।

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