रायपुर । भारत के शिक्षा परिदृश्य में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। युवा विद्यार्थी आज ज्ञानोन्मुखी शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के स्थान पर रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने लेगे हैं। देश में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का महत्व दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी भी एक ऐसा पाठ्यक्रम है जिसमें रोजगार-व्यवसाय की बेहतर संभावनाएं हैं। विगत कुछ वर्षो में खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी से संबंधित उपक्रम एक बडे एवं विस्तृत रूप में सामने आये हैं। सर्वेक्षण के द्वारा यह मालूम किया गया है कि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होने से एवं बदलते समय के अनुसार व्यस्त जिन्दगी में शहरी लोगो की जीवन शैली में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की मांग में लगातार बढोतरी हो रही है। भारत प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में विश्व में 13वें स्थान पर पहुंच गया है, जो यह दर्शाता है कि देश में प्रोसेस्ड फूड की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। इस प्रकार की स्थिति से हमारा प्रदेश भी अछूता नहीं है। छत्तीसगढ प्रदेश में विभिन्न फसलों, सब्जियों, फलों एवं लघु अनाज एवं वनोपज की प्रचुरता को देखते हुए इस प्रदेश में भी खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रसंस्करण की तकनीकों का उपयोग करते हुए अनेक प्रकार के डब्बा बंद, प्रसंस्कृत उत्पाद, इंस्टैन्ट/रेडी टू इट प्रकार के खाद्य व्यंजनों का निर्माण आसानी से किया जा सकता हैं। समय की कमी से लोग आज कल डब्बा बंद, प्रसंस्कृत उत्पाद, इंस्टैन्ट/रेडी टू इट प्रकार के खाद्य व्यंजनों को वरीयता दे रहें हैं। फसल और फल सब्जियों का उत्पादन लगातार बढता जा रहा हैं एवं उनकी खपत उस मौसम में न होने के कारण अधिकांश समय कृषकों को हानि की संभावना होती हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिये इन फसलों, फल, सब्जियों में खाद्य प्रौद्योगिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण की तकनीकों का उपयोग करके इनसे मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है जिसे कि गैरमौसमी समयकाल में आसानी से उपयोग किया जा सकता है एवं ऐसा करने से कृषक समुदाय को आर्थिक लाभ आवश्यक रूप से प्राप्त होगा। इन फसलों से मूल्यवर्धित पदार्थ बनाने से प्रदेश के किसानो, युवाओं, महिला स्व सहायता समूहों को रोजगार प्राप्त करने में भी आसानी होगी। आशय यह है कि खाद्य प्रौद्योगिकी आधारित प्रसंस्करण के कार्य भविष्य के लिये अत्यंत उपयोगी हैं एवं इस क्षेत्र के बहुमुखी विकास हेतु मानव संसाधन का विकास करना अति आवश्यक है।

भारत में कई राज्यों ने इस विषय की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने प्रदेशों जैसे महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश आदि प्रदेशों में या तो अनुसंधान केन्द्र प्रारंभ किये गये या बी. टेक. (खाद्य प्रौद्योगिकी) के शैक्षणिक संस्थान प्रारंभ किये गये। छत्तीसगढ राज्य में भी खाद्य प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2020 से प्रारंभ किया है। इस 4 वर्षीय पाठयक्रम के पश्चात बी.टेक. (फूड टेक्नालाजी) की उपाधि प्रदान की जाती है। इस पाठ्यक्रम की प्रति सेमेस्टर फीस लगभग 13 हजार गैर छात्रावास विद्यार्थी हेतु निर्धारित है। फीस इसका सिलेबस भारतीय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) नई दिल्ली द्वारा अनुमोदित हैं। इस बी.टेक. (फूड टेक्नालाजी) कोर्स की 36 सीटों में प्रवेश हेतु विद्यार्थी को गणित, भौतिक, रसायन विषय के साथ 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य हैं तथा व्यापम छत्तीसगढ द्वारा आयोजित पी.ई.टी. की परीक्षा में प्रावीणता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। इस 4 वर्षीय पाठयक्रम के दौरान विद्यार्थियों को खाद्य अभियांत्रिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, खाद्य रसायन, खाद्य माइक्रोबायोलाजी, खाद्य व्यापार प्रबंधन, खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता जॉच से संबंधित विषयों को महत्व के अनुसार शिक्षण एवं प्रायोगिक कार्य हेतु अलग-अलग घण्टे निर्धारित किये गये हैं। अंतिम वर्ष के विद्यार्थीयों को खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित संस्थानों/केन्द्रों/इंडस्टीज जैसे बेकरी उद्योग, रेडी-टू- ईट फूड, विभिन्न प्रकार के बेवरेजेज, खाद्यान्नों की पिसाई यूनिट, खाद्य तेल से संबंधित उद्योग, फल और सब्जी के विभिन्न मुल्यवर्धित पदार्थ तथा इनकी पैकेजिंग, दुग्ध एवं दुग्ध-निर्मित उत्पाद, अनाज प्रसंस्करण, कन्फेक्शनरी, चॉकलेट, सोया-निर्मित उत्पाद, नमकीन, स्नैक्स, चिप्स, बिस्कुट, तरह तरह के मसाला उद्योग में प्रशिक्षण हेतु अनुलग्न किया जावेगा एवं संतोषजनक प्रशिक्षण के पश्चात विद्यार्थी उपाधि हेतु योग्य होगा। बी.टेक (फूड टेक्नालाजी) स्नातक खाद्य प्रसंस्करण/खाद्य प्रौद्योगिकी संबंधित क्षेत्र के शासकीय/निजी संस्थान/उपक्रम में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं तथा देश/विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों/संस्थानों में उच्च अध्ययन हेतु प्रवेश ले सकते हैं। खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का प्रथम बैच मई 2024 में सभी प्रकार के प्रशिक्षण, इन्टर्नशीप एवं विषयों के अध्ययन पश्चात् परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका है। हर्ष का विषय है, कि इस महाविद्यालय के सभी 20 विद्यार्थियों को फूड इन्डस्ट्री से कैम्पस सेलेक्शन द्वारा PPO (Pre placement offer) प्राप्त हो चुका है। इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी हेतु www.igkv.ac.in का भ्रमण कर सकते हैं। प्रवेश संबंधी जानकारी हेतु 9425525249 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।

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