राजनांदगांव। मोदी सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि विधेयक बिल को जनपद सभापति व विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश साहू ने किसान विरोधी बताया है। उन्होंने कृषि बिल को अन्नदाता विरोधी बताया है। श्री साहू ने कहा कि मोदी, भाजपा सरकार असल मायने में देश कि किसानों को पंूजीपतियों के सामने झुकने के लिए मजबूर बना रही है। किसानों को आत्म निर्भर बनाने का नारा लगाने वाले, कृषि क्षेत्र में पूंजीपतियों पर निर्भर कर किसानों को गुलाम बनाने की चाल चल रहे है। नये कृषि विधेयक बिल से अब किसान पूंजीपतियों पर आश्रित होंगे, पूंजीपति चाहेंगे तो किसानों की फसल को खरीदेंगे, पूंजीपति नहीं चाहेंगे तो किसानों की फसल खड़े-खड़े वहीं पर खराब हो जायेंगी। कुल मिलाकर तो बर्बादी के अलावा इस बिल में ऐसा कोई लाभ किसानों को नहीं दिखता। मोदी सरकार किसानों से किये वादे को पूरा करने में असफल सिद्ध हुई है और अब अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। किसानों के साथ धोखा, छल, कपट किया जा रहा है। कृषि विधेयक बिल भारत की आत्मा पर प्रहार है। केंद्र सरकार से मांग करते है कि किसान विरोधी कृषि विधेयक बिल को तत्काल किसानों के हित में वापस लिया जाये। श्री साहू ने कहा कि भूपेश सरकार ने जब किसानों के धान को 2500 रूपये म्ंिटल के दाम पर खरीदा, तब मोदी-भाजपा सरकार ने धान खरीदी में आपत्ति की, धान खरीदी में नियम, शर्ते थोपकर अड़ंगा लगाया। संघीय व्यवस्थाओं को दरकिनार कर, सेंट्रल पुल में चावल लेने से इंकार किया। उस मोदी सरकार का किसानों की आय दोगुनी करने का दावा भी अच्छे दिन आयेंगे के नारे की तरह ही है, जिसका इंतजार बीते 6 साल से देश की एक अरब तैंतीस करोड़ जनता आज तक कर रही है।
